बजट से पहाड़ों को नई उड़ान: माउंटेन ट्रेल और बर्ड वॉचिंग से इको-टूरिज्म को बढ़ावा
New Delhi/Dehradun, 02 February: केंद्रीय बजट ने इस बार पर्यटन को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि रोजगार और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की कोशिश की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की घोषणा ने खास तौर पर उन राज्यों के लिए उम्मीदें बढ़ा दी हैं, जहां प्रकृति ही सबसे बड़ी पहचान है। माउंटेन ट्रेल और बर्ड वॉचिंग ट्रेल के सुनियोजित विकास के ऐलान के साथ इको-टूरिज्म को नई दिशा देने का संकेत दिया गया है, जिसमें उत्तराखंड को सबसे बड़ा लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
माउंटेन और बर्ड वॉचिंग ट्रेल्स के सुनियोजित विकास का ऐलान
बजट में पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को प्राथमिकता दी गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में ट्रेकिंग, हाइकिंग और प्रकृति-आधारित पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इन गतिविधियों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुभव में बदलने के लिए माउंटेन ट्रेल्स का विकास किया जाएगा। साथ ही, बर्ड वॉचिंग ट्रेल्स के जरिए पक्षी-अवलोकन को एक संगठित पर्यटन गतिविधि के रूप में स्थापित करने की योजना है।
100 से ज्यादा माउंटेन ट्रेल्स वाले उत्तराखंड को मिलेगा सीधा लाभ
उत्तराखंड के संदर्भ में यह पहल इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि राज्य में 100 से अधिक प्रमुख माउंटेन ट्रेल्स हैं। इनमें से कई ट्रेल्स आज भी बुनियादी सुविधाओं और संसाधनों की कमी के कारण अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाए हैं। बजट के प्रावधानों से इन ट्रेल्स पर संकेतक बोर्ड, सुरक्षा व्यवस्था, आधारभूत ढांचा, स्थानीय गाइडों का प्रशिक्षण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
बर्ड वॉचिंग ट्रेल्स से इको-टूरिज्म को मिलेगा नया आयाम
बर्ड वॉचिंग ट्रेल्स उत्तराखंड के इको-टूरिज्म को एक नया आयाम दे सकते हैं। राज्य के घने वन क्षेत्रों, झीलों और ऊंचाई वाले इलाकों में बड़ी संख्या में स्थानीय और प्रवासी पक्षी पाए जाते हैं। यदि इन क्षेत्रों में संगठित और चिन्हित ट्रेल्स विकसित किए जाते हैं, तो इससे शोधकर्ताओं, प्रकृति प्रेमियों और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकेगा। इसका सीधा फायदा स्थानीय युवाओं को मिलेगा, जिनके लिए गाइडिंग, होम-स्टे और अन्य पर्यटन गतिविधियों के जरिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे।
प्रदेश के पर्यटन सचिव धीराज गब्र्याल का कहना है कि बजट में किए गए प्रावधानों से माउंटेन ट्रेल्स को नए सिरे से विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे इको-टूरिज्म को मजबूती मिलेगी और आने वाले वर्षों में पर्यटन क्षेत्र उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत आधार बन सकता है।
उत्तराखंड के प्रमुख नेचर ट्रेल
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केदारकांठा – सर्दियों में ट्रेकिंग के लिए लोकप्रिय, हिमालयी दृश्य
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हर की दून – हिमालयी घाटी, समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध
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रूपकुंड – उच्च हिमालयी ट्रेल, ऐतिहासिक और रहस्यमयी झील
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पिंडारी ग्लेशियर – ग्लेशियर ट्रेकिंग और पर्वतीय अनुभव का प्रमुख केंद्र
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फूलों की घाटी – विश्व प्रसिद्ध बायोस्फीयर रिज़र्व, दुर्लभ पुष्प प्रजातियाँ
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नाग टिब्बा – शुरुआती ट्रेकर्स के लिए आदर्श, वीकेंड ट्रेल
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देवरिया ताल – झील आधारित नेचर ट्रेल, बर्ड वॉचिंग के लिए अनुकूल
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फूलचट्टी–नीलकंठ ट्रेल – धार्मिक और प्रकृति पर्यटन का संगम
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मुनस्यारी–खलिया टॉप – पंचाचूली पर्वत श्रृंखला के दृश्य, हाई-एल्टीट्यूड ट्रेल
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