भट्ट की नाराज़गी में छिपा है ‘रहस्य’: हरीश रावत
Dehradun, 08 September: उत्तराखंड की सियासत में ब्राह्मणों को लेकर नई बहस छेड़ने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोमवार को भाजपा पर तीखा वार किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट पर निशाना साधते हुए उन्होंने शास्त्र का हवाला दिया— “सत्यम ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात्, न ब्रूयात् सत्यम् अप्रियम्।”
रावत ने कहा, “मैंने छोटी सी टिप्पणी क्या की कि महेंद्र भट्ट मुझसे बहुत नाराज़ चल रहे हैं। कांग्रेस और ब्राह्मणों की राजनीतिक स्थिति को लेकर जो कुछ मैंने कहा, वह एक ऐतिहासिक घटनाक्रम का पृष्ठ है।”
कांग्रेस को बताया था “स्वभाव से ब्राह्मण”
कुछ दिन पहले हरीश रावत ने कांग्रेस को “स्वभाव से ब्राह्मण” बताते हुए पंडित जवाहरलाल नेहरू, मदन मोहन मालवीय और पंडित कमलापति त्रिपाठी जैसे नेताओं का उदाहरण दिया था। इस बयान के बाद से प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक उत्तराखंड में राजपूत लगभग 35% और ब्राह्मण करीब 25% हैं। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले हरदा का यह बयान राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया है।
एक्स हैंडल पर भट्ट को साधा निशाना
अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए रावत ने लिखा— “महेंद्र भट्ट उम्र में मेरे छोटे भाई हैं मगर रुतबे में बड़े हैं। वे सत्तारूढ़ दल के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद हैं। बागेश्वर में पत्रकारों के सवाल पर मैंने एक टिप्पणी की, जिसके बाद वह मुझ पर लगातार हमलावर हो रहे हैं।”
रावत ने भट्ट को याद दिलाया कि “मैंने 2002 में भी और 2012 में भी किसी की हक़तलफ़ी नहीं की। स्पष्ट बहुमत पक्ष में होने के बावजूद पांच साल मुख्यमंत्री के साथ खड़ा रहा। 2012 में भी केवल आह भरी। 2013 में तो पूरे उत्तराखंड और देश को लोगों ने आह भरने पर मजबूर कर दिया।”
“मैं किसी को हटाकर नहीं आया”
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं किसी को हटाकर नहीं आया। जो हटे, वह अपने कर्मों से हटे और मैं पार्टी नेतृत्व के आदेश से आया। मैंने निष्ठा के साथ कर्तव्य निभाया। उत्तराखंड की चौपट अर्थव्यवस्था, संचार व्यवस्था, पर्यटन आदि को रिकॉर्ड समय में पटरी पर लाया। भगवान केदारनाथ और बद्रीनाथ जी के आशीर्वाद से सबकुछ सुधारा। फिर भी भट्ट जी नाराज़ हैं। शायद इसी नाराज़गी में उनकी नौकरी का रहस्य छिपा हुआ है।”

