केदारनाथ धाम: महाशिवरात्रि पर ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में तिथि घोषित, सुबह 8 बजे वृष लग्न में शुरू होंगे दर्शन
Dehradun/Rudraprayag, 15 February: भगवान केदारनाथ के भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी है। महाशिवरात्रि पर्व के शुभ अवसर पर शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर (ऊखीमठ) में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित कर दी गई।
इस वर्ष केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे वृष लग्न में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।
केदारनाथ धाम की खास बातें
हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माने जाने वाले केदारनाथ धाम का विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है।
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केदारनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में पांचवां तथा उत्तराखंड के चार धामों में तीसरा धाम है।
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मान्यता है कि महाभारत काल में भगवान शिव ने पांडवों को यहां बैल (नंदी) के रूप में दर्शन दिए थे।
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आदि गुरु शंकराचार्य ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया था।
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समुद्र तल से लगभग 3,581 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर हिमालय की गोद में बसा है।
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स्कंद पुराण में गढ़वाल क्षेत्र को केदारखंड कहा गया है, जिसमें इस धाम का विशेष वर्णन मिलता है।
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बद्रीनाथ धाम का वर्णन भी स्कंद पुराण और विष्णु पुराण में मिलता है, जिससे इस क्षेत्र की धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है।
ऐसे पहुंचे केदारनाथ धाम
हवाई मार्ग:
सबसे नजदीकी एयरपोर्ट देहरादून का जॉलीग्रांट एयरपोर्ट है।
रेल मार्ग:
निकटतम रेलवे स्टेशन – ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून। यहां से बस और टैक्सी की सुविधा उपलब्ध रहती है।
सड़क मार्ग:
सड़क से पहले सोनप्रयाग पहुंचना होगा।
सोनप्रयाग से गौरीकुंड (लगभग 5 किमी) तक स्थानीय वाहन मिलते हैं।
ट्रेक मार्ग:
गौरीकुंड से केदारनाथ तक करीब 16–17 किमी पैदल यात्रा करनी पड़ती है।
वैकल्पिक सुविधा – घोड़ा, पालकी और हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध रहती है।
कपाट खुलने की तिथि घोषित होते ही देश-विदेश के श्रद्धालुओं में उत्साह बढ़ गया है। प्रशासन और मंदिर समिति यात्रा सीजन की तैयारियों में जुट गई है, जिससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन कराए जा सकें।
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