लीडलैस पेसमेकर से 69 वर्षीय महिला को नई ज़िंदगी, मणिपाल अस्पताल में सफल इलाज
Dehradun, 24 October: टालीगंज निवासी 69 वर्षीय महिला सुनीता रॉय (नाम परिवर्तित) को मणिपाल अस्पताल, मुकुंदपुर में सफलतापूर्वक लीडलैस पेसमेकर लगाया गया। यह प्रक्रिया डॉ. सौम्य पात्रा, कंसल्टेंट एवं इंचार्ज – कार्डियोलॉजी की देखरेख में पूरी की गई।
सुनीता रॉय लंबे समय से बेहोशी के दौरे और अनियमित दिल की धड़कन की समस्या से जूझ रही थीं। जांच में उनके शरीर में पैंसाइटोपीनिया (यानी लाल, सफेद और प्लेटलेट कोशिकाओं की कमी) पाई गई, जो लिवर सिरोसिस और हाइपरस्प्लेनिज़्म के कारण हुई थी। ऐसी स्थिति में पारंपरिक पेसमेकर लगाना अत्यंत जोखिमपूर्ण माना जाता है।
आगे की जांच में उन्हें सिक साइनस सिंड्रोम (दिल की अत्यधिक धीमी या अनियमित धड़कन) की पुष्टि हुई, जिसके बाद डॉक्टरों ने पारंपरिक तकनीक के बजाय लीडलैस पेसमेकर लगाने का निर्णय लिया।
डॉ. सौम्य पात्रा ने बताया कि यह केस चुनौतीपूर्ण था क्योंकि मरीज को गंभीर पैंसाइटोपीनिया था, जिससे ब्लीडिंग और अन्य जटिलताओं का खतरा अधिक था। लीडलैस पेसमेकर एक बेहतर और सुरक्षित विकल्प साबित हुआ। इस तकनीक से मरीज को जल्दी राहत मिली और उन्हें अगले ही दिन छुट्टी दे दी गई।
लीडलैस पेसमेकर का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें तारें (लीड्स) या छाती में सर्जिकल पॉकेट की आवश्यकता नहीं होती, जिससे संक्रमण का खतरा घटता है और रिकवरी तेज़ होती है।
मरीज सुनीता रॉय ने कहा कि मुझे कई बार अचानक बेहोशी आ जाती थी। मणिपाल अस्पताल के डॉक्टरों ने स्थिति समझाई और नया पेसमेकर लगाने की सलाह दी। आज मैं बिल्कुल ठीक महसूस कर रही हूँ और डॉक्टरों की टीम की बहुत आभारी हूँ।
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