दून घाटी और साइकिल: चुनौतियां एवं सम्भावनाएं विषय पर दून पुस्तकालय में मंथन

देहरादून I दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से दून घाटी और साइकिलिंग पर एक व्याख्यान का आयोजन पहाड़ी पेडलर्स के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का विषय दून घाटी और साइकिल: चुनौतियां एवं सम्भावनाएं था । इसमें विडियो व स्लाइड चित्रों के माध्यम से शानदार प्रस्तुति दी गई।

पहाड़ी पेडलर्स के गजेंद्र रमोला ने बताया कि देहरादून का इतिहास बिना साइकिल के अधूरा है। जब से साइकिल इजाद हुई देहरादून में साइकिल ही स्थानीय लोगो का आवागमन का मुख्य साधन था। सचित्र व्याख्यान द्वारा गजेंद्र ने बताया कि देहरादून में आज सबसे बड़ी समस्या जाम और बढ़ती गाड़ियों की है। उन्होंने कहा कि उनकी टीम पिछले पांच सालों से लगातार साइकिल संस्कृति को बढ़ावा दे रही है जिससे दून की अबोहवा स्वच्छ बनी रहे।देहरादून की सड़कों पर गाड़ियों का कितना दबाव है वो खुद आर टी ओ के आंकड़े बताते हैं।

सन 2000 में दून की आबादी 6 लाख थी जो आज बढ़कर 16 लाख के करीब हो चुकी है, और पंजीकृत वाहनों की संख्या 16 लाख को पार कर चुकी है। अब सड़कें हर समय जाम से जुझती है।

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देहरादून शहर के लिए सबसे बड़ी चिंता सार्वजनिक परिवहन बना हुआ है जो मात्र 4% है जबकि 96%निजी वाहन सड़कों पर दौड़ते है।देहरादून में सड़कों को चौड़ीकरण का खामियाजा यहाँ के सैड़कों साल पुराने पेड़ों को चुकाना पड़ रहा है। दिल्ली रोड, सहसधारा रोड, हरिद्वार सहित कई सड़कों को चौड़ा तो किया गया लेकिन किसी भी सड़क पर साइकिलिंग ट्रैक नहीं है।

साइकिल केवल ट्रांसपोर्ट का साधन ही नहीं बल्कि यह कई गंभीर रोगों से आपको बचाता है। साइकिल रोज चलाने से ह्रदय रोग का ख़तरा कम होता है। फिटनेस बेहतर होती है और शहर में ध्वनि और वायु प्रदूषण भी कम होता है।गजेंद्र ने कहा कि पहाड़ी पेडलर्स की टीम में 10 साल से लेकर 80 साल तक के युवा, बुजुर्ग और कई महिलाएं भी है। साइकिल सखी, दून पेडल टेल्स से लगातार साइकिल टूरिज्म को प्रमोट कर रहे है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री कल्याण सिंह रावत जी ने की उन्होंने कहा कि पहाड़ी पैडलर्स की टीम ने जिला प्रसाशन के साथ मिलकर करीब 70 से ज्यादा प्राकृतिक जल स्रोतों का चिन्हिकरण किया है जिसमें 40 से ज्यादा जल श्रोतों का सटीक दस्तावेजीकरण और मानचित्र तैयार कर दिया है।

व्याख्यान में महिला साइक्लिस्ट चाँदनी ने कहा कि पिछले एक साल से हम साइकिल सखी के द्वारा महिलाओं को भी साईकल चलाने के लिए प्रमोट कर रहे है।

गजेंद्र रमोला ने कहा कि साइक्लिस्टों के लिए सबसे बड़ी चुनौती साइकिल पाथ की कमी है जिसमें कई बार साइक्लिस्टों की दुर्घटनायें हो चुकी है। जहाँ साइकिल ट्रैक है वहां भी अतिक्रमण और पार्किंग के कारण ये शो पीस बने है।साइकिल राइडर कई बार दुर्घटनाओं के शिकार भी हो चुके है।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी चंद्रशेखर तिवारी ने स्वागत करते हुए कहा कि आज के इस विशेष कार्यक्रम का उद्देश्य साइकिल को केवल परिवहन साधन नहीं, बल्कि स्वस्थ, पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ जीवनशैली के रूप में स्थापित करने पर विचार करना है। साइकिल के माध्यम से आज हम तेजी से बढ़ते यातायात, प्रदूषण और शहरी दबाव के बीच साइकिल संस्कृति दून घाटी के लिए एक व्यवहारिक विकल्प दे सकते हैं. पहाड़ी पैडलर्स ने साइकिल अभियानों, पर्यावरण जागरूकता, पर्यटन और नागरिक सहभागिता के माध्यम से उल्लेखनीय कार्य किया है। श्री गजेन्द्र रमोला एवं उनकी टीम की यह प्रस्तुति दून के सतत और हरित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।

कार्यक्रम के अन्त में लोगों के लिए सवाल जबाब का एक सत्र भी रखा गया, जिसमें लोगों ने प्रश्न पूछे।
टीम की तरफ से कई युवा व सीनियर साइकिल राइडर तथा पुस्तकालयाध्यक्ष, डॉ.डी. के. पाण्डे, सुंदर सिंह बिष्ट, डॉ. लालता प्रसाद, जगदीश जोशी, संदीप गुसाईं, विजय भट्ट, शैलेन्द्र सेमवाल, अरुण कुमार असफल, देवेन्द्र काण्डपाल, डॉ. वी.के. डोभाल, कुलभूषण, आलोक कुमार सरीन, सहित कई पत्रकार, लेखक, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता इस मौके पर मौजूद रहे।

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