मनु भाकर के मेडल के पीछे था जसपाल राणा का मार्गदर्शन, उतार-चढ़ाव के बाद बनाई विजेता जोड़ी
Dehradun, 12 June 2026: जब पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर ने भारत के लिए दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा, तब सुर्खियों में सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं थी। उस सफलता के पीछे एक ऐसे कोच का भी योगदान था, जिसने भारतीय निशानेबाजी को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह नाम था—जसपाल राणा।
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भारतीय शूटिंग जगत में जसपाल राणा को सिर्फ एक सफल निशानेबाज के रूप में नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने वाले मार्गदर्शक के रूप में भी याद किया जाता है। मनु भाकर के साथ उनका रिश्ता भी कुछ ऐसा ही रहा, जिसमें विश्वास, संघर्ष, मतभेद और अंततः सफलता की कहानी शामिल है।
मनु भाकर जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही थीं, तब जसपाल राणा उनके शुरुआती मार्गदर्शकों में शामिल थे। दोनों की जोड़ी से भारतीय निशानेबाजी को बड़ी उम्मीदें थीं। हालांकि समय के साथ कुछ मतभेद भी सामने आए और दोनों ने अलग-अलग रास्तों पर काम करना शुरू कर दिया। उस समय कई लोगों को लगा कि शायद यह साझेदारी अब कभी पहले जैसी नहीं हो पाएगी।
लेकिन खेल की दुनिया में वापसी हमेशा संभव होती है। टोक्यो ओलंपिक की निराशा के बाद मनु भाकर अपने करियर के सबसे कठिन दौर से गुजर रही थीं। ऐसे समय में जसपाल राणा एक बार फिर उनके साथ खड़े नजर आए। अनुभव और खिलाड़ी की क्षमता पर अटूट भरोसे ने दोनों को दोबारा एक मंच पर ला खड़ा किया।
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इसके बाद शुरू हुआ तैयारी का वह दौर, जिसने भारतीय खेल इतिहास में एक नई कहानी लिखी। तकनीकी सुधार, मानसिक मजबूती और लगातार अभ्यास के जरिए मनु भाकर ने खुद को फिर से तैयार किया। जसपाल राणा की रणनीति और मार्गदर्शन ने उनकी तैयारी को नई धार दी।
पेरिस ओलंपिक में जब मनु भाकर ने दो पदक जीतकर इतिहास रचा, तब यह सिर्फ एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं थी। यह एक कोच और शिष्या के बीच विश्वास, धैर्य और समर्पण की जीत भी थी। वर्षों की मेहनत ने उस सपने को साकार कर दिया, जिसका इंतजार भारतीय निशानेबाजी लंबे समय से कर रही थी।
आज जसपाल राणा हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विरासत उन खिलाड़ियों में जीवित है जिन्हें उन्होंने तैयार किया। मनु भाकर की सफलता भी उसी विरासत का एक चमकदार अध्याय है। भारतीय खेल इतिहास में जब भी मनु के ओलंपिक पदकों का जिक्र होगा, उनके पीछे खड़े उस कोच का नाम भी सम्मान के साथ लिया जाएगा, जिसने एक खिलाड़ी को मुश्किल दौर से निकालकर ओलंपिक पोडियम तक पहुंचाया।
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