पॉक्सो और एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज है मामला, हाईकोर्ट ने ट्रायल की प्रगति पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया
Nainital | June 19, 2026
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 12 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी 66 वर्षीय ठेकेदार उस्मान खान की दूसरी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए फिलहाल कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने राज्य सरकार से ट्रायल की वर्तमान स्थिति पर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से दलील दी गई कि हाईकोर्ट ने पूर्व में जमानत याचिका खारिज करते हुए एडीजे हल्द्वानी को तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का निर्देश दिया था, लेकिन निर्धारित अवधि के बावजूद ट्रायल अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मामले के प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं और अब साक्ष्यों या गवाहों को प्रभावित करने की संभावना नहीं है। ऐसे में आरोपी को जमानत प्रदान की जानी चाहिए।
हालांकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और फिलहाल आरोपी को कोई राहत नहीं दी। कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित ट्रायल कोर्ट से मामले की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मामला नैनीताल के मल्लीताल थाना क्षेत्र का है, जहां उस्मान खान पर 12 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म करने का आरोप है। पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
घटना सामने आने के बाद नैनीताल में व्यापक जनाक्रोश देखने को मिला था। स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ की घटनाएं भी हुई थीं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा था। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जहां वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नैनीताल की प्रमुख सामाजिक एवं धार्मिक संस्था अंजुमन इस्लामिया ने भी आरोपी और उसके परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने की घोषणा की थी। संस्था के अध्यक्ष शोएब अहमद ने पत्रकार वार्ता में कहा था कि आरोपी को किसी भी धार्मिक, सामाजिक या पारिवारिक कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया जाएगा।
6 मई 2025 को हुई सुनवाई के दौरान तत्कालीन एसएसपी नैनीताल प्रह्लाद नारायण मीणा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश हुए थे। उन्होंने अदालत को बताया था कि आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के साथ-साथ एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी लगाई गई हैं, क्योंकि पीड़ित बच्ची अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित है।
अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान ट्रायल की प्रगति रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
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