PWD JE Regularisation Case में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से 10 दिनों के भीतर विभाग में रिक्त पदों की जानकारी मांगी है और कट-ऑफ डेट बढ़ाने की संभावना पर भी जवाब तलब किया है।
Nainital/Dehradun, 10 June 2026: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग में संविदा पर कार्यरत जूनियर इंजीनियरों (जेई) के नियमितीकरण और सेवा से हटाए जाने से जुड़े विवाद पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई की। एकलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वे 10 दिनों के भीतर कोर्ट को सूचित करें कि विभाग में जूनियर इंजीनियर के पदों पर वर्तमान में कितनी रिक्तियां मौजूद हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि क्या पूर्व में पारित आदेशों के आलोक में कट-ऑफ डेट (तय तिथि) को आगे बढ़ाया जा सकता है?
याचिकाकर्ता प्रसून नौटियाल व 83 अन्य की ओर से अदालत को बताया कि वे पिछले 10 से अधिक वर्षों से विभाग में संविदा के आधार पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। हाल ही में विभाग द्वारा उन्हें सेवामुक्त कर दिया है। जिसके खिलाफ उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। हालांकि, कोर्ट के अंतरिम आदेशों के चलते कई कर्मचारी अभी भी काम कर रहे हैं, लेकिन कुछ लोग नौकरी से बाहर हो चुके हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच द्वारा 11 जून 2025 को दिए गए आदेश के तहत सचिव लोनिवि को इन कर्मचारियों के मामलों पर व्यक्तिगत रूप से विचार कर वरिष्ठता के आधार पर नियमित करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन विभाग ने ऐसा नहीं किया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नाराजगी जताई कि लोनिवि सचिव ने प्रत्येक मामले पर व्यक्तिगत रूप से विचार करने के बजाय विभागाध्यक्ष द्वारा गठित एक समिति की सिफारिश पर सीधे तौर पर नियमितीकरण के दावों को खारिज कर दिया। जिससे व्यथित होकर कर्मचारियों को दोबारा कोर्ट आना पड़ा। इस मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को होगी।

