Thano Jama Masjid Case में हाईकोर्ट ने एमडीडीए को एक सप्ताह में आवश्यक दस्तावेजों की सूची देने और नए शमन आवेदन पर तीन माह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं
Nainital/Dehradun, 10 June 2026: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून के थानो जामा मस्जिद कमेटी द्वारा अनधिकृत निर्माण की सीलिंग और शमन आवेदन निरस्त होने के खिलाफ दायर रिट याचिका पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिका को निस्तारित कर दिया है। कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद और प्रतिवादी मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता राहुल कंसल ने पैरवी की।
मामले के अनुसार, जामा मस्जिद थानो कमेटी ने एमडीडीए के पीठासीन अधिकारी द्वारा 14 मई 2026 को जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत ‘द उत्तराखंड अर्बन एंड कंट्री प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1973’ की धारा 28ए के तहत उनके द्वारा किए गए निर्माण को सील करने का निर्देश दिया गया था। एमडीडीए के वकील ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता ने अवैध निर्माण के नियमितीकरण (शमन) के लिए आवेदन तो किया था, लेकिन भूमि के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज और उत्तराखंड वक्फ बोर्ड में पंजीकरण का प्रमाणपत्र जमा नहीं किया था, जिसके कारण 25 अप्रैल 2026 को उनका पुराना आवेदन खारिज कर दिया गया था।
सुनवाई के दौरान एमडीडीए के वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि यदि याचिकाकर्ता सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ नए सिरे से शमन के लिए आवेदन करता है, तो प्राधिकरण कानून के अनुसार उस पर दोबारा विचार करने को तैयार है। इस पर याचिकाकर्ता के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने सहमति जताते हुए कहा कि कमेटी एमडीडीए द्वारा मांगे गए सभी जरूरी कागजात और आपत्तियों का निवारण करते हुए नया आवेदन दाखिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद निर्देश दिया कि एमडीडीए का सक्षम प्राधिकारी आज से एक सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को लिखित रूप में उन सभी आवश्यक दस्तावेजों और आपत्तियों की सूची सौंपेगा जो आवेदन के लिए जरूरी हैं। इसके बाद याचिकाकर्ता द्वारा नया आवेदन और दस्तावेज जमा करने की तारीख से तीन महीने के भीतर एमडीडीए को कानून के अनुसार अंतिम निर्णय लेना होगा। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के पास उचित प्रक्रिया के तहत भूमि उपयोग परिवर्तन के लिए राज्य सरकार के समक्ष आवेदन करने का विकल्प भी खुला रहेगा।
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