Financial Action Task Force (FATF) के शीर्ष नेतृत्व में भारत की एंट्री, अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ा प्रभाव
International Desk | The India Vox
New Delhi | June 20, 2026
भारत ने वैश्विक वित्तीय और कूटनीतिक मंच पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक अधिकारी विवेक अग्रवाल को दुनिया की सबसे प्रभावशाली वित्तीय निगरानी संस्थाओं में से एक Financial Action Task Force (FATF) का उपाध्यक्ष (Vice President) चुना गया है। यह पहली बार है जब भारत को FATF के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिली है।
भारत सरकार ने इस नियुक्ति को वैश्विक स्तर पर देश की बढ़ती भूमिका और आतंकवाद के वित्तपोषण तथा मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ उसकी प्रतिबद्धता की बड़ी मान्यता बताया है।
क्या है FATF और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
FATF यानी Financial Action Task Force एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जिसकी स्थापना 1989 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद को मिलने वाली वित्तीय सहायता और अवैध वित्तीय गतिविधियों पर नजर रखना है। यह संस्था वैश्विक मानक तय करती है और विभिन्न देशों की वित्तीय प्रणालियों का मूल्यांकन करती है।
FATF की सिफारिशों का पालन दुनिया के 200 से अधिक देशों और क्षेत्रों द्वारा किया जाता है। भारत वर्ष 2010 से इसका पूर्ण सदस्य है।
कौन हैं विवेक अग्रवाल?
विवेक अग्रवाल 1994 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं और वर्तमान में भारत सरकार में संस्कृति मंत्रालय के सचिव के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-India) और FATF से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। उन्होंने FATF में भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी किया है।
उनका कार्यकाल जुलाई 2026 से जून 2027 तक रहेगा, जिसमें वे FATF की नीतियों और प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह नियुक्ति?
विशेषज्ञों का मानना है कि FATF के शीर्ष नेतृत्व में भारत की मौजूदगी देश की वैश्विक साख को मजबूत करेगी। इससे आतंकवाद के वित्तपोषण, हवाला नेटवर्क, अवैध धन प्रवाह और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराधों के खिलाफ भारत की आवाज और प्रभाव बढ़ सकता है।
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई और वित्तीय पारदर्शिता की वकालत करता रहा है।
FATF और पाकिस्तान का क्या है संबंध?
FATF का नाम अक्सर पाकिस्तान के संदर्भ में भी चर्चा में आता रहा है। अतीत में पाकिस्तान FATF की ग्रे लिस्ट में रह चुका है, जिससे उसे अंतरराष्ट्रीय निवेश और वित्तीय लेन-देन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। FATF की निगरानी को वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में बेहद प्रभावशाली माना जाता है।
भारत की वैश्विक भूमिका को मिला नया आयाम
विश्लेषकों के अनुसार FATF के उपाध्यक्ष पद पर भारत की नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि वैश्विक वित्तीय शासन में बढ़ते भारतीय प्रभाव का संकेत भी है। यह कदम दुनिया भर में वित्तीय अपराधों और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ भारत की सक्रिय भूमिका को और मजबूत करेगा।
विवेक अग्रवाल का FATF के उपाध्यक्ष पद पर चुना जाना भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में भारत की भागीदारी मजबूत होगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ चल रही मुहिम में भी देश की भूमिका और प्रभाव बढ़ेगा।
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