डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी लागू होंगे आचार संहिता के नियम
Nainital/Dehradun, 18 February: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर की जा रही कथित पत्रकारिता को लेकर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि पत्रकारिता के नाम पर की जाने वाली गतिविधियों को तथ्यों और आचार संहिता (Code of Ethics) के अनुरूप होना अनिवार्य है, अन्यथा संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
क्या है मामला
यह टिप्पणी याचिकाकर्ता पल्लवीत कुमार सिंह ठाकुर बनाम राज्य के मामले (रिट याचिका संख्या 249/2026) की सुनवाई के दौरान सामने आई। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि एक सोशल मीडिया आधारित मीडिया साइट द्वारा प्रसारित सामग्री से उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा है।
अदालत में क्या कहा गया
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया:
- मीडिया साइट के कारण लगातार व्हाट्सएप संदेश प्राप्त हो रहे थे
- शिकायत के बाद विभागीय कार्रवाई शुरू की गई
- संबंधित मीडिया बाइट को सोशल मीडिया से हटा दिया गया
- 2021 के शपथपत्र में रखी गई बातों का भी उल्लेख किया गया
किन कानूनों का दिया हवाला
अदालत में निम्न प्रावधानों का उल्लेख किया गया:
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000
- आईटी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस) नियम, 2011
- डिजिटल मीडिया से जुड़े नियमन
कोर्ट ने विशेष रूप से नियम-9(1) का उल्लेख करते हुए कहा कि, डिजिटल मीडिया प्रकाशक भी भारत के आचार संहिता नियमों का पालन करने के लिए बाध्य हैं।

कोर्ट का संदेश
हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिया कि:
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पत्रकारिता की आड़ में गलत या अप्रमाणित सामग्री प्रकाशित करने पर कार्रवाई की जा सकती है।
इस टिप्पणी के बाद साफ हो गया है कि अब डिजिटल और सोशल मीडिया आधारित पत्रकारिता भी पारंपरिक मीडिया की तरह जवाबदेह मानी जाएगी और नियमों का पालन अनिवार्य होगा।
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