05 सितंबर को सिद्धपीठ कुरुड़ से कैलाश के लिए निकलेगी नंदा देवी माँ की डोली, 20 सितंबर को होमकुंड पहुंचेगी यात्रा
नंदा नगर (चमोली), 23 जनवरी 2026। बसंत पंचमी के पावन पर्व पर सिद्धपीठ माँ नंदा धाम कुरुड़ में एक ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक घटना घटी। पौराणिक परंपराओं के अनुसार माँ नंदा अपने मूल मायके कुरुड़ में साक्षात अवतरित हुईं। इस दिव्य अवतरण के दौरान माँ ने उपस्थित श्रद्धालुओं एवं मंदिर समिति को स्पष्ट दैवीय आदेश दिया कि इसी वर्ष ‘माँ नंदा की बड़ी जात (ठुली जात)’ का आयोजन किया जाएगा।

विदित हो कि नंदाधाम कुरुड़ माँ नंदा का मूल मायका है, जहाँ उनकी स्वयंभू शिला मूर्ति स्थापित है। यहाँ से होने वाली प्रत्येक धार्मिक घोषणा का पूरे क्षेत्र में विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। माँ के इस आदेश के बाद वर्ष 2026 में आयोजित होने वाली, हिमालयी महाकुंभ के रूप में प्रसिद्ध विश्व की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्रा ‘बड़ी जात’ को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।
मंदिर समिति द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, 05 सितंबर 2026 को सिद्धपीठ कुरुड़ से माँ नंदा की डोली कैलाश के लिए प्रस्थान करेगी, जबकि 20 सितंबर 2026 को यात्रा अपने पावन गंतव्य होमकुंड पहुंचेगी।
इस शुभ अवसर पर पूरी यात्रा में माँ नंदा के साथ चलने वाला चौसिंगया खाड़ू भी सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर पहुंच चुका है। माँ की अनुमति के पश्चात मंदिर समिति ने यात्रा का दिनपट्टा (कार्यक्रम) जारी करते हुए व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।
बसंत पंचमी के इस पावन दिन नंदा नगर सहित पूरी घाटी माँ नंदा के जयकारों से गुंजायमान हो उठी। सिद्धपीठ नंदाधाम कुरुड़ में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। श्रद्धालु भगवती प्रसाद ने बताया कि माँ नंदा की कृपा से घोषित ‘बड़ी जात 2026’ अब सम्पूर्ण गढ़वाल और कुमाऊँ अंचल के लिए एक ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महापर्व बनने जा रही है। इस अवसर पर स्थानीय महिला मंगल दलों के साथ ही प्रसिद्ध लोकगायक दर्शन फर्स्वाण द्वारा माँ नंदा के भजनों की भक्तिमय प्रस्तुति दी गई, जिससे वातावरण पूर्णतः भक्तिरस में डूब गया।
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