उत्तराखंड आपदा 2025: ‘आप’ का सरकार पर वार, उठाए कड़े सवाल!
Dehradun, 18 September: उत्तराखंड में लगातार हो रही भीषण बारिश, बादल फटने की घटनाएँ और भूस्खलन से इस साल अब तक का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं, सैकड़ों घर और गाँव तबाह हो चुके हैं और अब तक दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है। इस भीषण त्रासदी के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) ने सरकार और संबंधित एजेंसियों की नाकामी पर कड़े सवाल उठाए हैं।
उत्तराखंड आपदा के लिए सरकार को बताया ज़िम्मेदार
AAP का कहना है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और अन्य वैज्ञानिक संस्थाएँ पूरी तरह से नाकाम रही हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि रोज़ाना रात 2 से 5 बजे के बीच हो रही असामान्य बारिश पर अब तक कोई वैज्ञानिक या आधिकारिक जाँच रिपोर्ट क्यों जारी नहीं की गई। AAP ने यह भी सवाल उठाया कि कहीं पहाड़ों को खाली करने की साज़िश के पीछे कोई विदेशी ताकतें तो नहीं हैं। पार्टी की ओर से यह मुद्दा भी उठाया गया कि 1951 में टाटा फर्म द्वारा पश्चिमी घाट में करवाई गई क्लाउड सीडिंग की तरह क्या उत्तराखंड में भी कृत्रिम बारिश कराई जा रही है? यदि हाँ, तो इसकी जानकारी जनता के सामने क्यों नहीं लाई जा रही। AAP ने सरकार से पूछा कि हर साल आपदाओं से सैकड़ों मौतें और हजारों करोड़ का नुकसान होने के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला गया और पहाड़ी इलाकों के लिए अलग व सटीक मौसम पूर्वानुमान प्रणाली क्यों नहीं विकसित की गई।
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उत्तराखंड आपदा की उच्च स्तरीय जांच की मांग

आम आदमी पार्टी उत्तराखंड के युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सचिन थपलियाल ने उत्तराखंड आपदा प्रबंधन की विफलता पर भी सरकार को घेरते हुए सवाल किया कि जब पूरी व्यवस्थाएँ ध्वस्त हो चुकी हैं, तब जिम्मेदार कौन है? इसके साथ ही पर्यावरण बचाओ के नाम पर बने संगठन और संस्थाएँ भी इस पूरे मुद्दे पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं। उन्होंने माँग की है कि उत्तराखंड में मॉनसून आपदा की उच्च स्तरीय वैज्ञानिक और न्यायिक जाँच कराई जाए। IIT रुड़की, ISRO और स्वतंत्र संस्थाएँ मौसम संबंधी घटनाओं की गहन जांच करें। भारत सरकार को सभी क्लाउड सीडिंग और कृत्रिम वर्षा प्रयोगों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए और पहाड़ों पर उन्नत आपदा चेतावनी प्रणाली जैसे राडार और मोबाइल अलर्ट की स्थापना तुरंत होनी चाहिए। साथ ही पीड़ित परिवारों को त्वरित राहत और पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए।
AAP का कहना है कि 2025 के मॉनसून के दौरान सरकारी एजेंसियाँ गैर-जिम्मेदार साबित हुई हैं। पार्टी ने मुख्यमंत्री से माँग की है कि विकास के नाम पर हो रही जंगलों की कटाई, अंधाधुंध निर्माण और भारी मशीनों के इस्तेमाल पर रोक लगे और मध्य हिमालय के पहाड़ों पर आपदा के असली कारणों की विशेष जांच की जाए।
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यह हैं प्रमुख मांगें
- उत्तराखंड आपदा की वैज्ञानिक और न्यायिक जाँच हो।
- IIT रुड़की, ISRO और स्वतंत्र संस्थाएँ उत्तराखंड में मौसम संबंधी घटनाओं की गहन जांच करें।
- भारत सरकार क्लाउड सीडिंग / कृत्रिम वर्षा प्रयोगों की जानकारी सार्वजनिक करे।
- उन्नत आपदा चेतावनी प्रणाली (राडार, मोबाइल अलर्ट) तुरंत स्थापित हो।
- उत्तराखंड आपदा के पीड़ित परिवारों को त्वरित राहत और पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए।

