उत्तराखंड में ‘बुरांश फ्लावर वीक’: चेरी ब्लॉसम की तर्ज पर मिलेगा नई पहचान
Dehradun, 14 September: जब पहाड़ों की ठंडी हवाओं में रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं, तो लगता है जैसे प्रकृति खुद मुस्कुरा रही हो। यही खूबसूरती अब उत्तराखंड में एक बड़े उत्सव का रूप लेने जा रही है। जापान के सकुरा और दक्षिण कोरिया के चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल की तरह अब उत्तराखंड भी अपना अनोखा ‘बुरांश फ्लावर वीक’ और ‘पद्म फ्लावर वीक’ आयोजित करने जा रहा है।
अप्रैल और अक्टूबर में होगा आयोजन
उत्तराखंड सरकार और राज्य वन विभाग ने तय किया है कि बुरांश फ्लावर वीक हर साल अप्रैल के पहले हफ्ते में और पद्म फ्लावर वीक अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में मनाया जाएगा। इन कार्यक्रमों में पर्यटक न सिर्फ हिमालयी वादियों की सुंदरता का आनंद लेंगे, बल्कि फूलों की खुशबू और उनके सांस्कृतिक महत्व से भी रूबरू होंगे।

पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
यह महोत्सव सिर्फ देखने का ही नहीं, बल्कि ईको-टूरिज्म और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का भी जरिया बनेगा। बुरांश के फूलों से बनने वाले शरबत, जैम, वाइन और अचार को बाजार मिलेगा। वहीं, पद्म के फूलों से जुड़ी हर्बल औषधियों के नए अवसर खुलेंगे।
संस्कृति और शिक्षा का संगम
महोत्सव के दौरान स्थानीय कलाकारों के लोकनृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, विद्यालयों में प्रतियोगिताएं, और औषधीय ज्ञान पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। यह आयोजन छात्रों, शोधकर्ताओं, पर्यावरणविदों और पर्यटकों को एक मंच पर लाएगा। दूसरी ओर वैज्ञानिक इस दौरान बुरांश और पद्म के फूलने के पैटर्न पर जलवायु परिवर्तन के असर का अध्ययन करेंगे। इससे इन प्रजातियों के संरक्षण और सतत पर्यटन की नई योजनाओं को दिशा मिलेगी।
उत्तराखंड के लिए नई पहचान
इस पहल से उत्तराखंड को पर्यटन की एक नई पहचान मिलेगी। अब लोग बर्फ और झरनों के साथ-साथ खिले हुए बुरांश और पद्म के फूलों की रंगत देखने के लिए भी आएंगे। यह पर्व न केवल आंखों को सुकून देगा, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन में भी खुशियां और रोज़गार के नए अवसर लेकर आएगा।
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