अल्पसंख्यक शिक्षा में बड़ा बदलाव, सरकार ने बनाया नया प्राधिकरण

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अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण गठित, मदरसा बोर्ड पर बदलाव की दिशा साफ

Dehradun, 03 February: उत्तराखंड में अल्पसंख्यक समुदायों की शिक्षा को लेकर लंबे समय से उठते सवालों के बीच सरकार ने एक अहम प्रशासनिक कदम उठाया है। शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा के लिए एक नया प्राधिकरण गठित करने का आदेश जारी किया है।.

उत्तराखंड सरकार द्वारा जारी अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण गठन से संबंधित सरकारी आदेश की प्रति

सरकारी आदेश के अनुसार यह प्राधिकरण राज्य में अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों की शिक्षा व्यवस्था, पाठ्यक्रम निर्धारण, शैक्षणिक गुणवत्ता और निगरानी से संबंधित कार्य करेगा। प्राधिकरण का कार्यकाल पदभार ग्रहण की तिथि से पांच वर्ष का होगा।

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अध्यक्ष और सदस्य घोषित

आदेश में डॉ. सुरजीत सिंह गांधी को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। गैर-सरकारी सदस्यों के रूप में प्रो. राकेश जैन, डॉ. सैय्यद अली हमीद, प्रो. पेमा तेनजिन, डॉ. एल्बा मेड्रिले, प्रो. रोबिना अमन, प्रो. गुरमीत सिंह, समाजसेवी राजेन्द्र बिष्ट और सेवानिवृत्त अधिकारी चंद्रशेखर भट्ट को शामिल किया गया है। इसके अलावा निदेशक महाविद्यालय शिक्षा, निदेशक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) और निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को प्राधिकरण में पदेन सदस्य बनाया गया है।

सिलेबस और शैक्षणिक निगरानी की जिम्मेदारी

आदेश के मुताबिक प्राधिकरण अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक ढांचा और पाठ्यक्रम तय करने, शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा संस्थानों की निगरानी से जुड़े निर्णय लेगा। सरकार का मानना है कि इससे अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता और पारदर्शिता आएगी।

मदरसा बोर्ड को लेकर सरकार की मंशा

सरकार पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि भविष्य में अल्पसंख्यक शिक्षा को एक साझा और आधुनिक ढांचे के तहत लाने की दिशा में काम किया जाएगा। इसी क्रम में जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड को लेकर बदलाव की तैयारी की बात कही गई है। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी बोर्ड को औपचारिक रूप से समाप्त करने के लिए अलग कानूनी प्रक्रिया और अधिसूचना आवश्यक होती है, जिसे तय समयसीमा में आगे पूरा किया जाएगा।

सरकारी आदेश के जरिए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन और सदस्यों की नियुक्ति पूरी तरह स्पष्ट हो चुकी है, जबकि मदरसा बोर्ड से जुड़ा अंतिम कानूनी फैसला आगे की प्रक्रिया का हिस्सा होगा।

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Ravi Priyanshu

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