युवा संघर्ष, रोजगार और मध्यमवर्गीय जीवन पर आधारित उपन्यास ‘आखिरी विज्ञापन’ का विमोचन
Dehradun, 19 February: जब सपनों और जिम्मेदारियों के बीच खड़ा युवा अपने भविष्य का रास्ता तलाशता है, तब जन्म लेती है ऐसी कहानी जो समाज का आईना बन जाती है। माया देवी विश्वविद्यालय में इसी भावभूमि पर आधारित युवा लेखक अभिषेक गौड़ की पुस्तक “आखिरी विज्ञापन (उम्मीदें यहीं खत्म होती हैं)” का गरिमामय लोकार्पण हुआ।

पुस्तक का विमोचन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. आशीष सेमवाल, वाइस प्रेसिडेंट डॉ. तृप्ति जुयाल सेमवाल तथा प्रो-वीसी प्रोफेसर संदीप विजय द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। समारोह में शिक्षा, रोजगार और युवा सशक्तिकरण पर सार्थक चर्चा भी हुई।
अनकहे संघर्षों की कहानी है आखिरी विज्ञापन
यह उपन्यास मध्यमवर्गीय जीवन के उन अनकहे संघर्षों को सामने लाता है, जहाँ सफलता केवल धन नहीं, बल्कि गरिमा के साथ जीवनयापन है। अभिजीत, अनन्या और विपलव जैसे पात्रों के माध्यम से लेखक ने रोजगार, पारिवारिक दबाव, सपनों और जिम्मेदारियों के द्वंद्व को जीवंत किया है। विशेष रूप से पिता-पुत्र के रिश्ते में छिपी चिंता, उम्मीद और बोझ को संवेदनशीलता से उकेरा गया है।

कार्यक्रम में कुलपति प्रो. डॉ. आशीष सेमवाल ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य युवाओं को रोजगारपरक और कौशलयुक्त बनाना है। डॉ. तृप्ति जुयाल सेमवाल ने तकनीकी दक्षता और आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं प्रो. संदीप विजय ने लेखक को बधाई देते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को विश्वविद्यालय की प्राथमिकता बताया।
‘आखिरी विज्ञापन’ केवल एक कहानी नहीं, बल्कि उन अनगिनत युवाओं की आवाज़ है जो हर दिन उम्मीद और हकीकत के बीच अपना रास्ता खोजते हैं।
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