1 नवंबर 2025 से बदलेंगे बैंकिंग नियम: ग्राहकों पर कैसे पड़ेगा असर, जानिए पूरी जानकारी

1 नवंबर 2025 से बदलेंगे बैंकिंग नियम

1 नवंबर 2025 से बदलेंगे बैंकिंग नियम — अब बैंक खाते और लॉकर होंगे और सुरक्षित, नामांकन प्रक्रिया हुई आसान

New Delhi, 24 October: देश के बैंकिंग सिस्टम में 1 नवंबर से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। वित्त मंत्रालय ने बैंकिंग प्रक्रिया को पारदर्शी और ग्राहक-हितैषी बनाने के लिए नए नियमों की घोषणा की है। इन बदलावों का असर न सिर्फ बैंकों पर, बल्कि हर आम नागरिक पर पड़ेगा। अब बैंक खाते, लॉकर और सेफ कस्टडी से जुड़ी प्रक्रियाएं और सरल, सुरक्षित और भरोसेमंद बनेंगी।

नामांकन हुआ आसान और लचीला

अब तक बैंक खातों या लॉकरों में नामांकन की प्रक्रिया सीमित थी — अधिकतर बैंक एक या दो नॉमिनी की अनुमति देते थे। लेकिन नए बैंकिंग नियम के अनुसार अब ग्राहक चार तक नॉमिनी जोड़ सकते हैं।
खास बात यह है कि हर नॉमिनी को अलग-अलग प्रतिशत में हिस्सा देना भी संभव होगा, जैसे किसी को 50%, किसी को 30% और किसी को 20%। इससे भविष्य में संपत्ति के बंटवारे से जुड़ी उलझनें और पारिवारिक विवाद काफी हद तक खत्म हो जाएंगे।

Sequential Nomination का नियम लागू

अगर किसी लॉकर या सेफ कस्टडी में कीमती चीजें रखी हैं, तो वहां क्रमवार नामांकन (Sequential Nomination) का नियम लागू होगा। यानी पहला नॉमिनी न रहने पर ही अगला व्यक्ति क्लेम कर सकेगा। इससे विवादों पर लगाम लगेगी और अधिकार स्पष्ट रहेंगे।

क्लेम निपटान होगा तेज़ और पारदर्शी

वित्त मंत्रालय के अनुसार, दावा निपटान (Claim Settlement) से जुड़ी नई व्यवस्था सभी बैंकों में एक समान होगी। अब यह प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी तेज़ और सरल होगी। ग्राहक अपने खाते या लॉकर से जुड़े क्लेम को डिजिटल माध्यम से भी ट्रैक कर सकेंगे। मंत्रालय जल्द ही ‘बैंकिंग कंपनी (नॉमिनेशन) नियम, 2025’ जारी करेगा, जिसमें यह विस्तार से बताया जाएगा कि नामांकन कैसे जोड़ा, बदला या रद्द किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकिंग नियम में यह बदलाव “Ease of Banking” की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। अब ग्राहकों को अपने पैसों और संपत्ति पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा, और परिवारों को अप्रत्याशित परिस्थितियों में राहत पाने में देरी नहीं होगी।

सिस्टम में आएगी पारदर्शिता और जवाबदेही

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों का उद्देश्य केवल नामांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बैंकिंग ढांचे में जवाबदेही और गवर्नेंस सुधारना है।

नए अधिनियम के तहत:

* सहकारी बैंकों में निदेशकों के कार्यकाल को पारदर्शी बनाया जाएगा।
* ऑडिट क्वालिटी में सुधार कर वित्तीय गड़बड़ियों पर लगाम लगेगी।
* बैंकों की रिपोर्टिंग प्रक्रिया एकसमान होगी, जिससे ग्राहक को एक बैंक से दूसरे बैंक तक समान सुविधा मिलेगी।

वित्त विशेषज्ञों के अनुसार इन बदलावों से बैंकिंग सेक्टर में विश्वास बढ़ेगा। यह सिर्फ प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि ग्राहक अधिकारों को सशक्त करने की दिशा में ठोस कदम है।

आप पर इसका क्या असर पड़ेगा

  • अब आप चार नॉमिनी तक नामांकित व्यक्ति चुन सकते हैं।
  • क्लेम प्रक्रिया तेज़ होगी, परिवार को संपत्ति या जमा राशि के दावे में परेशानी नहीं होगी।
  • विवादों की संभावना घटेगी, और हर क्लेम रिकॉर्ड पारदर्शी तरीके से बैंक सिस्टम में उपलब्ध रहेगा।
  • लॉकर या खाते में रखे पैसे और कीमती सामान पर आपका नियंत्रण और सुरक्षा दोनों बढ़ेंगे।

इन नए बैंकिंग नियमों से भारत का बैंकिंग सिस्टम “Trust First Banking” की दिशा में आगे बढ़ रहा है। लंबे समय से ग्राहक नामांकित व्यक्ति की अस्पष्टता, क्लेम निपटान में देरी या लॉकर विवाद जैसी समस्या का सामना कर रहे थे। अब उनका स्थायी समाधान संभव दिख रहा है। यह कदम न सिर्फ बैंकों की पारदर्शिता बढ़ाएगा, बल्कि ग्राहकों और संस्थानों के बीच विश्वास की नई नींव रखेगा।

 

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Ravi Priyanshu

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