सड़क हादसे में घायल की जान बचाने के लिए आगे आने वाले लोगों को ₹25,000 तक का पुरस्कार मिल सकता है। वहीं, पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को ₹1.50 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा देने का प्रावधान है। देहरादून में आयोजित संगोष्ठी में इन योजनाओं के प्रचार-प्रसार और प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।
देहरादून |16 अक्टूबर 2026।
सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने और आम लोगों को उनकी मदद के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को सर्वे चौक स्थित अनुसंधान विकास एवं प्रशिक्षण संस्थान (आईआरडीटी) ऑडिटोरियम में एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें प्रधानमंत्री राहत योजना और राह-वीर (नेक राहगीर) योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कैबिनेट मंत्री खजान दास और जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने दीप प्रज्वलित कर किया। संगोष्ठी में पुलिस, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क एवं वन विभाग के अधिकारियों के साथ विशेषज्ञ और चिकित्सक शामिल हुए।
घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाना क्यों जरूरी?
सड़क दुर्घटना के बाद शुरुआती समय घायल व्यक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से उसकी जान बचाने की संभावना बढ़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए संगोष्ठी में गोल्डन ऑवर के दौरान घायलों को अस्पताल पहुंचाने और आपातकालीन उपचार की व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर चर्चा की गई।
कैबिनेट मंत्री खजान दास ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों की मदद के लिए प्रत्येक व्यक्ति का जागरूक और संवेदनशील होना जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री राहत और राह-वीर योजना की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया, ताकि जरूरत के समय लोग सहायता के लिए आगे आ सकें।
घायलों को ₹1.50 लाख तक कैशलेस इलाज
संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने बताया कि प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल पात्र व्यक्ति को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ₹1.50 लाख तक कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
इसका उद्देश्य दुर्घटना के बाद आर्थिक परेशानी के कारण इलाज में होने वाली देरी को कम करना और पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। यह सुविधा योजना की पात्रता, निर्धारित नियमों और संबंधित अस्पतालों की व्यवस्था के अनुसार मिलती है।
नेक राहगीर को ₹25 हजार तक पुरस्कार
राह-वीर यानी नेक राहगीर योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर के दौरान अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने में मदद करने वाले व्यक्ति को ₹25,000 तक का नकद पुरस्कार दिए जाने का प्रावधान है।
इसके अतिरिक्त, वर्षभर में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चयनित राह-वीरों को राष्ट्रीय स्तर पर ₹1 लाख की पुरस्कार राशि, ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित करने की व्यवस्था भी बताई गई।
इन योजनाओं का उद्देश्य आम नागरिकों को सड़क दुर्घटना पीड़ितों की सहायता के लिए प्रोत्साहित करना और मदद करने को लेकर उनके मन में मौजूद भय या संकोच को दूर करना है।
सड़क सुरक्षा के लिए विभागों में बेहतर समन्वय पर जोर
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति के पीछे एक पूरा परिवार होता है। ऐसे में घायल को समय पर उपचार उपलब्ध कराना मानवीय जिम्मेदारी है।
उन्होंने ई-डीएआर और टीएमएस पोर्टल पर प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा संबंधित सुविधाओं को अधिक अस्पतालों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में जनहानि रोकने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और आम लोगों की सहभागिता जरूरी है।
संगोष्ठी में आपातकालीन नंबर 112, पुलिस के ई-डीएआर और नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के टीएमएस 2.0 प्लेटफॉर्म से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों से योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और दुर्घटना पीड़ितों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने का आह्वान किया गया।
सड़क दुर्घटनाओं में जनहानि रोकना बड़ी चुनौती
संगोष्ठी के दौरान विशेषज्ञों ने सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में प्रतिवर्ष लगभग 5.13 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें करीब 1.83 लाख लोगों की मौत और 4.6 लाख लोगों के घायल होने का उल्लेख किया गया। प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं में हर घंटे औसतन लगभग 21 लोगों की जान जाती है।
हालांकि, इन आंकड़ों के स्रोत और संबंधित रिपोर्ट वर्ष की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। विशेषज्ञों ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम करने के लिए त्वरित उपचार, प्रभावी राहत एवं बचाव व्यवस्था और जनसहभागिता पर विशेष ध्यान देना होगा।
कार्यक्रम में महानिदेशक परिवहन अनिल गर्व्याल, निदेशक शिक्षा खड़क सिंह दत्ताल, संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव कुमार मेहरा, अपर जिलाधिकारी स्मृता परमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार शर्मा, जिला संभागीय परिवहन अधिकारी अनिता चमोला सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और सरकारी एवं निजी अस्पतालों के वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे।
सड़क हादसा दिखे तो क्या करें?
सड़क दुर्घटना देखने पर सबसे पहले अपनी और दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। जरूरत पड़ने पर आपातकालीन नंबर 112 पर सूचना दें और घायल को चिकित्सा सहायता दिलाने में सहयोग करें। किसी भी तरह की मदद करते समय अनावश्यक जोखिम न लें।








