उत्तराखंड के प्रमुख हिंदी समाचार पत्रों की भाषा पर किया शोध, डॉ. संजू झा के निर्देशन में पूरा हुआ शोध कार्य; दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. रवि प्रकाश टेकचंदानी ने किया मूल्यांकन
देहरादून | 22 सितंबर, 2026
उत्तराखंड की हिंदी पत्रकारिता और प्रमुख समाचार पत्रों की भाषा पर केंद्रित शोध कार्य के लिए डॉ. ईशा रानी को डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई है। उन्होंने महाराज विनायक ग्लोबल यूनिवर्सिटी, जयपुर से हिंदी विषय में अपना शोध कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया।
डॉ. ईशा रानी का शोध विषय “उत्तराखंड से प्रकाशित प्रमुख हिंदी समाचार पत्रों की भाषा का विश्लेषणात्मक अध्ययन—अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिंदुस्तान के विशेष संदर्भ में” रहा। यह शोध कार्य डॉ. संजू झा के निर्देशन में पूरा किया गया।
शोध के दौरान उत्तराखंड से प्रकाशित प्रमुख हिंदी समाचार पत्रों में प्रयुक्त भाषा, शब्दावली, भाषा-शैली, वाक्य-विन्यास और समाचार प्रस्तुति के विभिन्न भाषायी पक्षों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में समाचार पत्रों की भाषा पर क्षेत्रीय, सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश के प्रभाव को भी समझने का प्रयास किया गया।
शोध कार्य का मूल्यांकन डॉ. रवि प्रकाश टेकचंदानी, निदेशक, नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ सिंधी लैंग्वेज, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार एवं प्रोफेसर ऑफ सिंधी, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली तथा डिपार्टमेंट ऑफ मॉडर्न इंडियन लैंग्वेजेज एंड लिटरेरी स्टडीज (MILLS), दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, द्वारा बतौर परीक्षक किया गया। उनके मूल्यांकन के बाद निर्धारित अकादमिक प्रक्रिया पूरी करते हुए डॉ. ईशा रानी को डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई।
इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. राज कमल मिश्रा ने डॉ. ईशा रानी को डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने पर शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
डॉ. ईशा रानी ने अपने शोध के माध्यम से उत्तराखंड की हिंदी पत्रकारिता में भाषा के स्वरूप, उसके प्रयोग और समय के साथ उसमें आए बदलावों को अकादमिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया है। उनका अध्ययन हिंदी पत्रकारिता की भाषा और उत्तराखंड के क्षेत्रीय संदर्भ को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण शोध प्रयास है।
डॉ. ईशा रानी ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने शोध निर्देशक डॉ. संजू झा, परीक्षक डॉ. रवि प्रकाश टेकचंदानी, विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं परिवारजनों के सहयोग और मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए गौरव का विषय होने के साथ-साथ हिंदी भाषा और पत्रकारिता के क्षेत्र में आगे भी शोध एवं अकादमिक कार्य करने की प्रेरणा है।
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