वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (UTU) का 9वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न, AI से ‘कॉस्मिक इंटेलिजेंस’ तक भारत की भूमिका पर जोर
Dehradun, 22 April: Veer Madho Singh Bhandari Uttarakhand Technical University, देहरादून में बुधवार को नवम दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर कुल 5 हजार से अधिक विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियाँ प्रदान की गईं, जबकि 14 शोधार्थियों को पीएचडी की डिग्री और 37 विद्यार्थियों को स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक से सम्मानित किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि ले.ज.गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), राज्यपाल उत्तराखंड एवं कुलाधिपति ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्हें नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज के युवा केवल रोजगार खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बनें और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित शिक्षा, उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि यह दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के परिश्रम और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने तकनीकी शिक्षा के विस्तार और उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में इसकी उपयोगिता पर बल दिया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि संस्थान में वर्तमान में 26 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं तथा शोध के क्षेत्र में 37 पेटेंट पंजीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 25 प्रकाशित हो चुके हैं।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा अब तक 34 हजार से अधिक उपाधियाँ डिजिलॉकर के माध्यम से प्रदान की जा चुकी हैं, जो डिजिटल पारदर्शिता का उदाहरण है।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- 5,000+ विद्यार्थियों को उपाधि
- 37 मेडल (स्वर्ण, रजत, कांस्य)
- 14 शोधार्थियों को पीएचडी
- 124 सीटों वाले छात्रावास का उद्घाटन
- AI Literacy Mission और Smart Lab की घोषणा
समारोह से पूर्व विश्वविद्यालय परिसर में 124 सीटों वाले महिला छात्रावास सहित अन्य अधोसंरचनात्मक परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया गया। इसके साथ ही एआई लिटरेसी मिशन, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग लैब और EVORA ऐप जैसी नई पहलों की घोषणा की गई।
मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य में “कॉस्मिक इंटेलिजेंस” के रूप में विकसित होगी और भारत इसमें अग्रणी भूमिका निभाएगा। उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, नवाचार करने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया।
समारोह में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षाविद्, अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं उनके अभिभावक उपस्थित रहे।
दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए नए अवसरों, जिम्मेदारियों और उज्ज्वल भविष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
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