Nasha Mukt Vidyalaya: 2026-29 तक स्कूलों में जागरूकता, शिक्षक प्रशिक्षण और निगरानी के जरिए नशे व तंबाकू के खिलाफ चलेगा विशेष अभियान
New Delhi, 30 May 2026: देश के करोड़ों स्कूली छात्रों को नशे और तंबाकू के बढ़ते खतरे से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर नई पहल शुरू की है। शिक्षा मंत्रालय ने ‘Nasha Mukt Vidyalaya Action Plan 2026-29’ लॉन्च किया है, जिसके तहत स्कूलों में जागरूकता अभियान, शिक्षक प्रशिक्षण, निगरानी व्यवस्था और विशेष पोर्टल के माध्यम से नशे के खिलाफ संगठित अभियान चलाया जाएगा।
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राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में हुई पहल की शुरुआत
स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (DoSEL), शिक्षा मंत्रालय द्वारा 29 मई को आयोजित School Challenge–TOFEI 2025 के राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में इस पहल की शुरुआत की गई। कार्यक्रम का उद्घाटन स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि छात्रों को तंबाकू और नशीले पदार्थों से दूर रखने के लिए केवल जागरूकता पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए स्कूलों, शिक्षकों, अभिभावकों और समाज की सामूहिक भागीदारी भी आवश्यक है।
तीन साल के एक्शन प्लान में क्या है खास?
सरकार द्वारा शुरू किए गए तीन वर्षीय Nasha Mukt Vidyalaya Action Plan (2026-2029) का उद्देश्य स्कूल स्तर पर रोकथाम, जागरूकता, निगरानी और क्षमता निर्माण को मजबूत करना है। इसके तहत एक समर्पित डिजिटल पोर्टल विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से विभिन्न गतिविधियों की निगरानी और क्रियान्वयन किया जाएगा। साथ ही पाठ्यक्रम में नशा विरोधी विषयों को शामिल करने, शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देने और राष्ट्रीय से लेकर जिला स्तर तक जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई गई है।
स्कूलों की भूमिका पर एनसीईआरटी का जोर
कार्यक्रम में विशेष संबोधन देते हुए एनसीईआरटी के निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी ने कहा कि नशा मुक्त और तंबाकू मुक्त भारत के निर्माण में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि स्कूल केवल शिक्षा देने का केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे बच्चों में जिम्मेदार व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और सकारात्मक जीवन मूल्यों का निर्माण भी करते हैं।
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देशभर के शिक्षा विशेषज्ञ हुए शामिल
कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों, स्वायत्त संस्थाओं के अधिकारियों तथा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह पहल स्कूलों में सुरक्षित, स्वस्थ और सकारात्मक वातावरण तैयार करने के साथ-साथ विद्यार्थियों को नशे की लत से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
क्यों जरूरी है यह अभियान?
विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था में नशे और तंबाकू की लत एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में स्कूल स्तर पर शुरू किया गया यह अभियान आने वाले वर्षों में जागरूकता बढ़ाने और नशे के प्रति शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की संस्कृति विकसित करने में मददगार साबित हो सकता है।
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