Uttarakhand Hydrogen Valley: ग्रीन एनर्जी हब बनने की दिशा में उत्तराखंड का बड़ा कदम

Uttarakhand Hydrogen Valley से निवेश और रोजगार को नई उड़ान।

Uttarakhand Hydrogen Valley परियोजना से ग्रीन एनर्जी, रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा, IIT रुड़की बनेगा नवाचार का केंद्र।

Roorkee, 29 May 2026: स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तराखंड को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। आईआईटी रुड़की में आयोजित हाइड्रोजन कॉन्क्लेव के दौरान राज्य में Uttarakhand Hydrogen Valley विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया। इस परियोजना का उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन आधारित ऊर्जा तंत्र को बढ़ावा देना और उत्तराखंड को देश के प्रमुख हरित ऊर्जा केंद्रों में शामिल करना है।

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ऊर्जा विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं की मौजूदगी में आयोजित इस कॉन्क्लेव में ग्रीन हाइड्रोजन की संभावनाओं और इसके आर्थिक व पर्यावरणीय लाभों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य की जल विद्युत क्षमता और नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन Uttarakhand Hydrogen Valley परियोजना को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

क्या है Uttarakhand Hydrogen Valley?

हाइड्रोजन वैली एक ऐसा एकीकृत इकोसिस्टम होता है, जहां हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग से जुड़ी पूरी श्रृंखला विकसित की जाती है। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा के रूप में हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देना और पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना है।

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प्रस्तावित Uttarakhand Hydrogen Valley में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग किया जाएगा। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा।

IIT Roorkee निभाएगा अहम भूमिका

परियोजना के तहत आईआईटी रुड़की को ज्ञान एवं नवाचार केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। संस्थान नई तकनीकों पर शोध, पायलट परियोजनाओं का संचालन, उद्योगों को तकनीकी सहायता और युवाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेगा।

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इसके अलावा सरकारी विभागों, ऊर्जा कंपनियों, स्टार्टअप्स और निजी उद्योगों के सहयोग से राज्य में एक मजबूत हाइड्रोजन वैल्यू चेन विकसित करने की योजना है। इससे Uttarakhand Hydrogen Valley को राष्ट्रीय स्तर की परियोजना के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।

जोधपुर मॉडल से मिलेगी प्रेरणा

कॉन्क्लेव में राजस्थान के जोधपुर हाइड्रोजन वैली मॉडल का भी उल्लेख किया गया। वहां शोध संस्थानों, उद्योगों और सरकारी एजेंसियों के समन्वय से हाइड्रोजन तकनीक के क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है। उत्तराखंड में भी इसी सहयोगी मॉडल को अपनाने पर जोर दिया गया है।

पर्यावरण और रोजगार दोनों को मिलेगा लाभ

विशेषज्ञों के अनुसार Uttarakhand Hydrogen Valley परियोजना राज्य में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद करेगी। ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग से वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन कम होगा, जो पर्वतीय और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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इसके साथ ही परियोजना निवेश आकर्षित करने, नए उद्योग स्थापित करने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने में भी सहायक साबित हो सकती है। ऊर्जा क्षेत्र में नए स्टार्टअप्स और तकनीकी नवाचारों को भी इससे प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

उत्तराखंड के लिए नई ऊर्जा पहचान

यदि Uttarakhand Hydrogen Valley परियोजना को सफलतापूर्वक लागू किया जाता है, तो राज्य आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख ग्रीन एनर्जी हब के रूप में उभर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि उत्तराखंड को स्वच्छ और टिकाऊ विकास के मॉडल के रूप में भी स्थापित करेगी।

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