El Nino के संकेतों से बढ़ी चिंता, मानसून 2026 में सामान्य से कम बारिश का अनुमान
IMD के ताजा पूर्वानुमान में El Nino के प्रभाव के चलते मानसून 2026 के दौरान देश में सामान्य से कम बारिश और कई राज्यों में अधिक गर्मी की आशंका जताई गई है।
New Delhi, 29 May 2026: देश में मानसून 2026 को लेकर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का ताजा पूर्वानुमान चिंता बढ़ाने वाला है। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि प्रशांत महासागर में El Nino की स्थिति विकसित हो सकती है, जिसका असर इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ने की आशंका है। IMD के अनुसार जून से सितंबर 2026 के दौरान देश में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना सबसे अधिक है।
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मौसम विभाग के अद्यतन दीर्घावधि पूर्वानुमान के मुताबिक इस वर्ष मानसूनी वर्षा दीर्घावधि औसत (LPA) का लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसका मतलब है कि देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की जा सकती है।
El Nino और मानसून 2026: एक नजर में
| पैरामीटर | IMD का अनुमान |
|---|---|
| मुख्य मौसमीय कारक | El Nino |
| मानसून अवधि | जून–सितंबर 2026 |
| देशव्यापी वर्षा | LPA का 90% |
| वर्षा की स्थिति | सामान्य से कम |
| जून 2026 की बारिश | सामान्य से नीचे |
| उत्तर-पूर्व भारत | सामान्य वर्षा की संभावना |
| मध्य भारत | सामान्य से कम बारिश |
| उत्तर-पश्चिम भारत | सामान्य से कम बारिश |
| दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत | सामान्य से कम बारिश |
| तापमान | सामान्य से अधिक |
| हीटवेव | कई राज्यों में बढ़ सकती है |
El Nino क्या है?
El Nino प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्री सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि की स्थिति है। इसका प्रभाव वैश्विक मौसम प्रणाली पर पड़ता है। भारत में El Nino अक्सर कमजोर मानसून, कम बारिश और अधिक गर्मी से जुड़ा माना जाता है।
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IMD के अनुसार वर्तमान में ENSO (एल नीनो-दक्षिणी दोलन) तटस्थ स्थिति से El Nino की ओर बढ़ रहा है। नवीनतम जलवायु मॉडल भी मानसून सीजन के दौरान El Nino के विकसित होने के संकेत दे रहे हैं।
किन क्षेत्रों में कम बारिश की आशंका?
पूर्वानुमान के अनुसार मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना सबसे अधिक है। वहीं उत्तर-पूर्व भारत में बारिश सामान्य रह सकती है।
मौसम विभाग ने मानसून कोर जोन (MCZ) में भी सामान्य से कम वर्षा का अनुमान जताया है। यह क्षेत्र देश के अधिकांश वर्षा आधारित कृषि इलाकों को कवर करता है, इसलिए इसका असर खेती पर पड़ सकता है।
जून में भी कमजोर रह सकती है बारिश
IMD के अनुसार जून 2026 में देशभर में औसत वर्षा सामान्य से नीचे रहने की संभावना है। हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर-पूर्व भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।
गर्मी और लू बढ़ा सकती है परेशानी
कम बारिश के साथ जून महीने में तापमान भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक लू वाले दिनों की संभावना जताई है।
महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में भी हीटवेव का असर देखने को मिल सकता है।
El Nino का क्या पड़ सकता है असर?
| क्षेत्र | संभावित प्रभाव |
|---|---|
| कृषि | खरीफ फसलों पर दबाव |
| जल संसाधन | जलाशयों में कम जलभराव |
| जलविद्युत उत्पादन | उत्पादन प्रभावित होने की आशंका |
| पेयजल आपूर्ति | कई क्षेत्रों में दबाव बढ़ सकता है |
| तापमान | गर्मी और लू में वृद्धि |
| पर्यावरण | सूखे जैसी परिस्थितियों का खतरा |
किसानों और राज्यों के लिए चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि El Nino मजबूत होता है तो इसका असर कृषि उत्पादन, जल उपलब्धता और बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है। ऐसे में जल संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन और सूखा राहत योजनाओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी।
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IMD ने राज्यों और जिला प्रशासनों को समय रहते तैयारी करने, जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी है।
जुलाई के पूर्वानुमान पर रहेगी नजर
मौसम विभाग ने बताया कि जुलाई 2026 के लिए विस्तृत वर्षा पूर्वानुमान जून के अंतिम सप्ताह में जारी किया जाएगा। विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि El Nino कितना मजबूत होता है और मानसून पर उसका वास्तविक प्रभाव कितना पड़ता है।
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