Youth Unemployment in India: डिग्री बढ़ीं, नौकरी कम हुई? युवाओं की सबसे बड़ी चिंता

Youth Unemployment in India: डिग्री बढ़ीं, नौकरी कम हुई? युवाओं की सबसे बड़ी चिंता

Youth Unemployment in India: डिग्री और नौकरी के बीच बढ़ता अंतर

23 May 2026

Special Report:

भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। हर साल लाखों छात्र कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से डिग्री लेकर निकलते हैं। इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, कंप्यूटर साइंस, बीए, बीकॉम और यहां तक कि पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। लेकिन सवाल यह है कि अगर डिग्रियां बढ़ रही हैं, तो नौकरी की चिंता भी उतनी ही तेजी से क्यों बढ़ रही है?

आज का युवा सिर्फ नौकरी नहीं खोज रहा, बल्कि “स्थिर भविष्य” खोज रहा है — और यही सबसे बड़ी बेचैनी बन चुकी है।

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बढ़ती डिग्रियां, लेकिन सीमित अवसर

ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) के अनुसार भारत में उच्च शिक्षा में दाखिले का आंकड़ा लगातार बढ़ा है। करोड़ों छात्र हर साल ग्रेजुएशन कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ नौकरी बाजार उसी गति से नहीं बढ़ पाया।

स्थिति यह है कि कई सेक्टरों में कंपनियां अनुभव मांग रही हैं, जबकि फ्रेशर्स के पास अनुभव नहीं है। दूसरी ओर, लाखों युवा छोटी नौकरियों के लिए भी ओवरक्वालिफाइड हो चुके हैं।

युवा बेरोजगारी के आंकड़े क्या कहते हैं?

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट की रिपोर्ट के अनुसार भारत में शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी दर अशिक्षित युवाओं की तुलना में अधिक देखी गई है। खासतौर पर डिग्रीधारी युवाओं में नौकरी का संकट ज्यादा गंभीर दिखाई देता है।

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के कई सर्वे यह संकेत देते रहे हैं कि 20–29 वर्ष आयु वर्ग में रोजगार को लेकर अस्थिरता लगातार बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या सिर्फ बेरोजगारी नहीं, बल्कि “रोजगार की गुणवत्ता” भी है। बड़ी संख्या में युवा अपनी योग्यता से कम वेतन वाली नौकरियां करने को मजबूर हैं।

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डिग्री और स्किल के बीच बढ़ती दूरी

कॉलेजों से निकलने वाले लाखों युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती “Employability” बन चुकी है। कई रिपोर्टों में यह सामने आया है कि बड़ी संख्या में ग्रेजुएट्स इंडस्ट्री की जरूरत के हिसाब से तैयार नहीं हैं।

आईटी, एआई, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल सेक्टर तेजी से बदल रहे हैं, लेकिन शिक्षा प्रणाली का बड़ा हिस्सा अभी भी पुराने पैटर्न पर चल रहा है। परिणाम यह है कि डिग्री होने के बावजूद कंपनियां ट्रेनिंग पर अतिरिक्त खर्च करने से बचती हैं।

मुद्दा वर्तमान स्थिति
Higher Education Enrollment लगातार बढ़ रहा
Youth Unemployment शिक्षित युवाओं में ज्यादा
Government Job Demand लाखों आवेदन प्रति vacancy
Private Sector Jobs Contract और unstable
Skill Gap Industry-ready candidates की कमी
Career Pressure Anxiety और uncertainty बढ़ी

सरकारी नौकरी का बढ़ता क्रेज

निजी क्षेत्र में अस्थिरता और छंटनी की खबरों के बीच सरकारी नौकरी का आकर्षण और बढ़ गया है। एक पद के लिए लाखों आवेदन अब सामान्य बात हो चुकी है।

रेलवे, SSC, बैंकिंग और राज्य स्तरीय परीक्षाओं में आवेदन संख्या लगातार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है। इसकी बड़ी वजह नौकरी की सुरक्षा, स्थिर आय और सामाजिक प्रतिष्ठा मानी जा रही है।

मानसिक दबाव भी बड़ा संकट

करियर को लेकर अनिश्चितता का असर युवाओं की मानसिक स्थिति पर भी दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर “successful life” की लगातार तुलना, परिवार की अपेक्षाएं और आर्थिक दबाव युवाओं में चिंता और आत्मविश्वास की कमी बढ़ा रहे हैं।

कई युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते रहते हैं, लेकिन सफलता सीमित सीटों तक सिमट जाती है। इससे निराशा और असुरक्षा की भावना और गहरी होती जा रही है।

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आखिर समाधान क्या है?

विशेषज्ञों के अनुसार सिर्फ डिग्री आधारित शिक्षा अब पर्याप्त नहीं रह गई है। आने वाले समय में स्किल आधारित प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, डिजिटल क्षमताएं और व्यावहारिक अनुभव सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इसके साथ ही छोटे शहरों में रोजगार अवसर बढ़ाना, स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत करना और उद्योगों की जरूरत के अनुसार शिक्षा प्रणाली को अपडेट करना भी जरूरी माना जा रहा है।

भारत के युवाओं के पास डिग्रियां तो हैं, लेकिन उनके मन में भविष्य को लेकर भरोसा कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि “नौकरी” अब सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि मानसिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा का प्रतीक बन चुकी है।

डिग्री बढ़ने और अवसरों के बीच का यह अंतर आने वाले वर्षों में भारत की सबसे बड़ी सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों में से एक बन सकता है।

References:

  • International Labour Organization (ILO)
  • Institute for Human Development (IHD)
  • AISHE Report
  • CMIE Employment Data

#TheIndiaVox

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