अमेरिकी बाजार से बाहर एजीएल की पहुंच बढ़ेगी, रत्न प्रमाणन में बनेगा नया ग्लोबल प्लेटफॉर्म
Dehradun, 03 February: रत्न और आभूषण उद्योग में एक अहम कारोबारी घटनाक्रम के तहत इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (इंडिया) लिमिटेड (IGI) ने अमेरिकन जेमोलॉजिकल लेबोरेटरीज़ (AGL) के अधिग्रहण की घोषणा की है। यह सौदा रंगीन रत्नों (कलर्ड जेमस्टोन) के विश्लेषण, प्रमाणन और उनके मूल स्रोत की पहचान के क्षेत्र में आईजीआई की वैश्विक मौजूदगी को और मजबूत करेगा।
इस अधिग्रहण के साथ IGI के व्यापक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर का मेल AGL की गहरी वैज्ञानिक विशेषज्ञता से हुआ है। दोनों संगठनों के साथ आने से रत्न एवं आभूषण उद्योग को अधिक भरोसेमंद, पारदर्शी और एकरूप सर्टिफिकेशन इकोसिस्टम मिलने की उम्मीद है।

आईजीआई (IGI) के मैनेजिंग डायरेक्टर और ग्लोबल सीईओ तेहमास्प प्रिंटर ने कहा कि यह अधिग्रहण उद्योग में बड़े पैमाने पर बदलाव लाने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि एजीएल की वैज्ञानिक क्षमता और IGI के वैश्विक प्लेटफॉर्म के संयोजन से ऐसा सर्टिफिकेशन सिस्टम तैयार होगा, जो भविष्य की जरूरतों के अनुरूप होगा और वैज्ञानिक निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं करेगा।
वहीं, एजीएल (AGL) के प्रेसिडेंट और चीफ जेमोलॉजिस्ट क्रिस्टोफर स्मिथ ने इसे संगठन के लिए वैश्विक स्तर पर विस्तार का बड़ा अवसर बताया।
अधिग्रहण के प्रमुख बिंदु
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रणनीतिक विस्तार: आईजीआई (IGI) के वैश्विक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए एजीएल अब अमेरिकी बाजार से बाहर भी अपनी रंगीन रत्न प्रमाणन सेवाएं बढ़ा सकेगा।
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व्यावसायिक निरंतरता: एजीएल (AGL) का मुख्यालय न्यूयॉर्क में ही रहेगा और क्रिस स्मिथ पहले की तरह संगठन का नेतृत्व करते रहेंगे।
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शिक्षा व रिसर्च पर जोर: एजीएल (AGL) की वैज्ञानिक विशेषज्ञता को आईजीआई के प्रशिक्षण और शिक्षा कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा।
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दीर्घकालिक निवेश रणनीति: आईजीआई (IGI) को समर्थन देने वाली निवेश कंपनी Blackstone के दीर्घकालिक निवेश दृष्टिकोण के तहत लैब सुविधाओं, रिसर्च और प्रतिभा विकास में निवेश जारी रहेगा।
भारत–अमेरिका रत्न बाजार को मजबूती
इस सौदे से अमेरिका—जो प्रीमियम ज्वेलरी और रंगीन रत्नों का सबसे बड़ा बाजार है—और भारत—जो रत्न निर्माण, सोर्सिंग और प्रमाणन का वैश्विक केंद्र है—के बीच रणनीतिक संबंध और मजबूत होंगे। संयुक्त प्लेटफॉर्म अब वैश्विक बाजार में मूल स्रोत की जानकारी, पारदर्शिता और मानकीकरण की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बेहतर स्थिति में होगा।
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