इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (IGI) का चौथी तिमाही में दमदार प्रदर्शन
Dehradun, 29 January: इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (इंडिया) लिमिटेड (IGI) ने वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अपनी मजबूत वैश्विक स्थिति को और पुख्ता किया है। कंपनी ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही में राजस्व में 21 प्रतिशत और EBITDA में 26 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की है।
सभी प्रमुख सेगमेंट्स में मजबूती
कुदरती हीरे, लैब में बने हीरे, आभूषण और रत्न प्रमाणन—हर क्षेत्र में IGI की पकड़ और मज़बूत होती दिखी। खासतौर पर प्रमाणन सेवाओं से होने वाली आय में इस तिमाही में 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो कंपनी के कोर बिज़नेस की ताकत को दिखाती है।
तिमाही के अहम वित्तीय आंकड़े
इस तिमाही में प्रमाणन से IGI को 3,049 मिलियन रुपये का राजस्व मिला, जबकि EBITDA 1,913 मिलियन रुपये तक पहुंच गया। वहीं कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) 1,346 मिलियन रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है।
पूरे साल का दमदार प्रदर्शन
दिसंबर 2025 में समाप्त हुए 12 महीनों के दौरान संचालन से प्राप्त कुल राजस्व में 17 प्रतिशत और EBITDA में 23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। EBITDA मार्जिन 56.9 प्रतिशत से बढ़कर 59.9 प्रतिशत हो गया, जबकि समेकित शुद्ध लाभ (PAT) 5,316 मिलियन रुपये तक पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।
रणनीतिक योजनाओं पर कर रहे कार्य
IGI के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ तेहमास्प प्रिंटर ने कहा कि कंपनी ने रणनीतिक योजनाओं पर लगातार काम करते हुए हर क्षेत्र में मजबूती दिखाई है। उनके मुताबिक, नेचुरल डायमंड सर्टिफिकेशन के साथ-साथ लैब-ग्रोन डायमंड्स के प्रमाणन कारोबार में तेज़ी आई है और भारत समेत वैश्विक बाजारों में LGD ज्वेलरी की मांग लगातार बढ़ रही है।
इंडस्ट्री ट्रेंड और बदलता बाज़ार
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि ग्राहकों की पसंद में बदलाव, टेक्नोलॉजी में प्रगति और प्रमाणन की बढ़ती ज़रूरत के चलते हीरा और आभूषण उद्योग एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। भारत में बढ़ती आय, उभरता मध्यम वर्ग और लग्जरी निवेश के रूप में हीरों के प्रति आकर्षण इस सेक्टर को नई दिशा दे रहा है।
भविष्य की दिशा
लैब-ग्रोन डायमंड्स की बढ़ती स्वीकार्यता ने बाजार की तस्वीर बदल दी है। किफायती और पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण LGD तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। ऐसे में स्वतंत्र और भरोसेमंद प्रमाणन संस्थाओं की भूमिका और भी अहम हो गई है, जहां IGI अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
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