एक ही झटके में फिसली चांदी, बाजार में हड़कंप
MCX पर भारी गिरावट, तीन दिन में बदला पूरा रुख
New Delhi/ Dehradun: कीमती धातुओं के बाजार में इस समय भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। चांदी के दामों में एक ही दिन में आई तेज गिरावट ने निवेशकों और सर्राफा बाजार — दोनों को चौंका दिया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी, हालिया रिकॉर्ड ऊंचाई से फिसलकर अब तेज दबाव के दौर में आ चुकी है।
आज का हाल: MCX पर कहां पहुंची चांदी
शुक्रवार को MCX पर चांदी (फ्यूचर्स) ₹3.30 लाख से ₹3.50 लाख प्रति किलोग्राम के दायरे में कारोबार करती दिखाई दी। बाजार में तेज उतार-चढ़ाव के कारण दिनभर भाव बदलते रहे, लेकिन कुल मिलाकर चांदी अपने हालिया उच्च स्तर से काफी नीचे बनी रही।
पिछले तीन दिन में कैसे बदला चांदी का ट्रेंड
अगर बीते तीन कारोबारी दिनों पर नजर डालें तो चांदी की चाल बेहद नाटकीय रही है—
- 29 जनवरी:
MCX पर चांदी ने रिकॉर्ड तेजी दिखाते हुए ₹4 लाख प्रति किलोग्राम से ऊपर का स्तर छू लिया। - 30 जनवरी:
ऊंचे स्तरों पर पहुंचते ही मुनाफावसूली शुरू हुई और कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। - 31 जनवरी (आज):
गिरावट का सिलसिला जारी रहा और चांदी ₹3.30–₹3.50 लाख प्रति किलो के आसपास कारोबार करती दिखी।
यानी सिर्फ तीन दिनों में चांदी ने रिकॉर्ड ऊंचाई से तेज फिसलन का रास्ता तय किया।
गिरावट के पीछे क्या हैं बड़ी वजहें
विशेषज्ञों के मुताबिक, चांदी में आई इस भारी गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं—
- मुनाफावसूली का दबाव:
रिकॉर्ड तेजी के बाद निवेशकों ने लाभ सुरक्षित करना शुरू किया, जिससे बिकवाली बढ़ गई। - वैश्विक संकेत:
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर बदली उम्मीदों का असर कीमती धातुओं पर पड़ा। - उच्च अस्थिरता:
चांदी एक साथ औद्योगिक और निवेश धातु है, इसलिए बाजार में अनिश्चितता बढ़ते ही इसमें उतार-चढ़ाव तेज हो जाता है।
आर्थिक असर: किसे नुकसान, किसे राहत
इस गिरावट का सीधा असर उन निवेशकों पर पड़ा है जिन्होंने ऊंचे स्तरों पर खरीदारी की थी, खासकर वायदा कारोबार और ETF से जुड़े निवेशकों को नुकसान झेलना पड़ा है।
वहीं दूसरी ओर, सर्राफा कारोबार और औद्योगिक उपयोग से जुड़े खरीदारों के लिए कीमतों में आई नरमी आगे चलकर कुछ राहत दे सकती है, अगर भाव स्थिर होते हैं।
आगे क्या कहता है बाजार
बाजार जानकारों का मानना है कि मौजूदा गिरावट को पूरी तरह संकट नहीं, बल्कि तेज उछाल के बाद एक करेक्शन के रूप में भी देखा जा सकता है।
- अगर वैश्विक स्तर पर डॉलर मजबूत बना रहता है, तो चांदी पर दबाव कुछ समय और रह सकता है।
- लेकिन भू-राजनीतिक तनाव या आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने की स्थिति में चांदी की मांग दोबारा मजबूत हो सकती है।
चांदी का बाजार इस समय बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। हालिया रिकॉर्ड तेजी के बाद आई यह गिरावट बताती है कि कमोडिटी बाजार में जोखिम हमेशा बना रहता है। फिलहाल निवेशकों के लिए सावधानी और संतुलित रणनीति अपनाना ही बेहतर रास्ता माना जा रहा है।
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