सूरत कट डायमंड को GI टैग, EDII की बड़ी पहल
पारंपरिक शिल्पों को पहचान दिलाने और कारीगरों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
Dehradun, 17 March: एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (EDII), अहमदाबाद ने पारंपरिक शिल्पों के संरक्षण और कारीगरों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में अहम भूमिका निभाई है। संस्थान के सहयोग से ‘सूरत कट (डायमंड)’ को भौगोलिक संकेत (GI) प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है।
यह उपलब्धि 13–14 मार्च को आयोजित दो दिवसीय ‘आईपी यात्रा’ कार्यक्रम के दौरान सामने आई, जिसमें देशभर से 500 से अधिक उद्यमी, कारीगर, स्टार्टअप और विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन MSME मंत्रालय के सहयोग से किया गया।
इस मौके पर कंट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट्स, डिज़ाइन्स एंड ट्रेड मार्क्स डॉ. उन्नत पंडित ने सूरत डायमंड एसोसिएशन को GI प्रमाणपत्र सौंपा। सूरत का डायमंड उद्योग वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान रखता है और भारत के करीब 90% पॉलिश्ड डायमंड यहीं तैयार होते हैं।
कार्यक्रम में टंगालिया शॉल और माता नी पछेड़ी जैसे पारंपरिक शिल्पों से जुड़े कारीगरों को भी GI अधिकृत उपयोगकर्ता प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
EDII अब तक गुजरात के पांच प्रमुख शिल्पों—सूफ एम्ब्रॉयडरी, सोदागरी ब्लॉक प्रिंट, सुजनी वीविंग, सदेली क्राफ्ट और सूरत कट डायमंड—को GI टैग दिलाने में सहयोग कर चुका है। वहीं 15 अन्य उत्पादों के लिए GI प्रक्रिया जारी है।
संस्थान ने कारीगरों को सहयोग देने के लिए NABARD समर्थित GI फैसिलिटेशन सेंटर भी स्थापित किया है, जिससे उन्हें बाजार से जोड़ने में मदद मिल रही है।
विशेषज्ञों ने कार्यक्रम में पेटेंट और GI टैग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि पारंपरिक ज्ञान और शिल्पों की सुरक्षा के लिए बौद्धिक संपदा अधिकार बेहद जरूरी हैं।
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