UGC ने सभी विश्वविद्यालयों को दिए साइबर जागरूकता बढ़ाने के निर्देश
New Delhi, 02 October: सोचिए… सुबह उठकर आप मोबाइल ऑन करते हैं और अचानक बैंक अकाउंट खाली! ज़रा कल्पना कीजिए… किसी फर्जी ईमेल पर क्लिक करते ही आपकी सारी निजी जानकारी हैकर्स के पास पहुँच जाए। डिजिटल युग में यह डर अब कल्पना नहीं, बल्कि हकीकत बन चुका है। रोज़ाना हज़ारों लोग साइबर अपराधियों का शिकार बन रहे हैं। इन्हीं खतरों से बचाव के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक खास पहल करते हुए “A Handbook on Basics of Cyber Hygiene” ई-बुक लॉन्च की है।
ई-बुक क्यों है खास?
यह गाइडबुक न सिर्फ छात्रों के लिए, बल्कि शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए भी तैयार की गई है। इसमें रोज़मर्रा की ऑनलाइन गतिविधियों में बरती जाने वाली सावधानियों को सरल और व्यवहारिक भाषा में समझाया गया है।
- मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का महत्व
- फिशिंग ईमेल और नकली वेबसाइट की पहचान
- सोशल मीडिया पर गोपनीयता बनाए रखने के टिप्स
- डिजिटल पेमेंट और बैंकिंग सुरक्षा
- साइबर अपराध की शिकायत कैसे और कहाँ करें
शिक्षा जगत में नई जागरूकता
यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से अपील की है कि वे इस ई-बुक को छात्रों तक पहुँचाएँ और नियमित साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाएँ। विशेषज्ञ मानते हैं कि पढ़ाई से लेकर नौकरी और बैंकिंग तक, हर क्षेत्र ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर शिफ्ट हो चुका है, ऐसे में साइबर हाइजीन वैकल्पिक नहीं बल्कि ज़रूरी है।
क्यों है यह ज़रूरी?
भारत में हर दिन हज़ारों साइबर फ्रॉड केस दर्ज होते हैं। बड़ी बात यह है कि शिकार बनने वालों में सबसे ज़्यादा संख्या छात्रों और युवाओं की है। जागरूकता की कमी ही साइबर अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार है।
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