Valley of Words 2025: साहित्य, कला और विरासत का शानदार संगम

Valley of Words 2025: साहित्य, कला और विरासत का शानदार संगम

Valley of Words 9th edition: शब्द, संस्कृति और सृजन का पर्व देहरादून में गूंजा

Dehradun, 25 October: दून घाटी एक बार फिर साहित्य, कला और संवाद के रंगों में डूब उठी। वैली ऑफ वर्ड्स (Valley of Words) के नौवें संस्करण ने पहले ही दिन शहर को शब्दों, सुरों और विचारों के उत्सव में बदल दिया। भारत की विविधता, संवेदना और सृजनशीलता को समर्पित यह आयोजन अब केवल एक साहित्यिक महोत्सव नहीं, बल्कि संस्कृति और विचार का जीवंत संवाद बन चुका है, जहाँ हर मंच से शब्द और संगीत एक साथ गूंजते हैं।

गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं पुण्यतिथि की स्मृति को समर्पित रहा समारोह

शनिवार को होटल मधुबन में आरंभ हुए कार्यक्रम का उद्घाटन समारोह गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं पुण्यतिथि की स्मृति को समर्पित रहा। “सीस दिया, सिरार न दिया” थीम के अंतर्गत हुए कार्यक्रम में गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के सदस्यों द्वारा शबद कीर्तन प्रस्तुत किया गया। इसके बाद आयोजित हुए संवाद सत्र में उत्तराखंड के राज्यपाल ले. ज. गुरमीत सिंह (सेनि.), पूर्व विशेष मुख्य सचिव (पंजाब) के. बी. एस. सिद्धू, पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय, ले. ज. पी.जे.एस. पन्नू, राजेन्द्र डोभाल, डॉ. संजीव चोपड़ा और ज्योति धवन सहित कई विशिष्ट वक्ताओं ने भाग लिया।

शनिवार को होटल मधुबन में आरंभ हुए कार्यक्रम का उद्घाटन समारोह गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं पुण्यतिथि की स्मृति को समर्पित रहा। “सीस दिया, सिरार न दिया” थीम के अंतर्गत हुए कार्यक्रम में गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के सदस्यों द्वारा शबद कीर्तन प्रस्तुत किया गया। इसके बाद आयोजित हुए संवाद सत्र में उत्तराखंड के राज्यपाल ले. ज. गुरमीत सिंह (सेनि.), पूर्व विशेष मुख्य सचिव (पंजाब) के. बी. एस. सिद्धू, पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय, ले. ज. पी.जे.एस. पन्नू, राजेन्द्र डोभाल, डॉ. संजीव चोपड़ा और ज्योति धवन सहित कई विशिष्ट वक्ताओं ने भाग लिया।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उत्तराखंड के राज्यपाल ले. ज. गुरमीत सिंह (सेनि.) ने वैली ऑफ वर्ड्स 2025 के उद्घाटन सत्र में अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि शब्द केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति हैं। उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी की विरासत को नमन करते हुए कहा कि यह उत्सव भारत की एकता, करुणा और विचारशीलता का जीवंत प्रतीक है।

अनूप नौटियाल द्वारा संचालित इस सत्र में गुरु तेग बहादुर के त्याग, करुणा और नैतिक साहस की विरासत पर विचार रखे गए। कार्यक्रम में प्रसार भारती, हिम ज्योति स्कूल, गुरु नानक स्कूल और गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब ट्रस्ट का विशेष सहयोग रहा। उद्घाटन के साथ ही परिसर में ‘इति स्मृति’ और ‘इति लेख’ जैसे स्मृति व हस्तशिल्प कोने स्थानीय रचनाशीलता और समुदाय भावना का प्रतीक बने।

बुक अवॉर्ड्स से हुई शुरुआत

पहले दिन की शुरुआत प्रतिष्ठित VoW Book Awards 2025 से हुई। अंग्रेज़ी फिक्शन श्रेणी में लक्ष्मी मुर्देश्वर पुरी की पुस्तक “Swallowing the Sun” को सम्मानित किया गया, जिसका सत्र मनोज़ बार्थवाल ने संयोजित किया। वहीं हिंदी नॉन-फिक्शन श्रेणी में सुधीर विद्यार्थी की “बिदाई दे मा!” पर हुए सत्र में ममता किरण ने संचालन किया, जिसमें स्वतंत्रता आंदोलन के गुमनाम नायकों की माताओं के संघर्ष को भावनात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया।

कथक और भरतनाट्यम ने मोहा मन

बजाज इंस्टिट्यूट ऑफ लर्निंग के सहयोग से आयोजित इंडियन साइन लैंग्वेज कार्यशाला ने समावेशन का सुंदर संदेश दिया। इसके बाद शालिनी राव द्वारा क्यूरेट ‘इति नृत्य’ कार्यक्रम में धनाश्री जोगलेकर (कथक) और लक्ष्मण विनायक (भरतनाट्यम) ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। ‘कहो कविता’ सत्र में अतुल शर्मा, सोमेश्वर पांडेय, ममता किरण, भारती शर्मा और इंदु अग्रवाल ने हिंदी, उर्दू और पंजाबी कविता के माध्यम से संवेदनाओं की नई परिभाषा गढ़ी।

विद्यार्थियों ने रखे विचार

‘युवा वाणी : माय विज़न ऑफ उत्तराखंड@2047’ सत्र में राज्य के प्रतिष्ठित विद्यालयों के विद्यार्थियों ने हिंदी, गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी, पंजाबी, नेपाली, संस्कृत, अंग्रेज़ी और तिब्बती जैसी आठ भाषाओं में अपने विचार रखे। सचिन चौहान के संचालन और अमना मिर्ज़ा की अध्यक्षता में हुए इस सत्र ने आने वाले उत्तराखंड की नई सोच और सतत विकास का खाका प्रस्तुत किया।

खाद्य उद्योग और जैविक परंपरा पर संवाद

‘Ann: Farm to Table’ सत्र में रूपा सोनी, नुपुर अग्रवाल (KIWI), श्रुति गुप्ता (Coco; Monsoon) और योजना खंडूरी चौधरी (Himalayan Rasoiya) ने उत्तराखंड के उभरते खाद्य उद्योग और जैविक परंपरा पर संवाद किया। वहीं RS टोलिया फोरम फॉर सस्टेनेबिलिटी में “The Glaciers Are Melting – Are We Listening?” शीर्षक पर राजेन्द्र डोभाल, हरीश बहुगुणा और कुसुम अरुणाचलम ने हिमालयी पारिस्थितिकी पर गंभीर विमर्श किया।
मुख्य मंच पर ले. ज. पी.जे.एस. पन्नू द्वारा संयोजित ‘मिलिट्री हिस्ट्री एंड स्ट्रैटेजी’ सत्र में जनरल वी.के. अहलूवालिया (A General’s Odyssey) और जनरल शक्ति गुरूंग (Breaking the Glass Ceiling) ने अपने अनुभव साझा किए। इसके बाद कुलभूषण कैन के संचालन में दिवंगत सुधीर अरोड़ा को श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही ‘Poetry Café’ में हरजीत लल्ली, अजय जुगरान, दीपांजली सिंह, शुभ्रा पांडे और निकिता अग्रवाल ने अपनी कविताओं से शब्दों का संसार रचा।

शास्त्रीय संगीत की प्र​स्तुतियों ने बांधा समां

पहले दिन का समापन ITC-SRA म्यूजिकल सोइरी इवनिंग से हुआ, जिसमें सितार वादक सृजनी बनर्जी और तबला वादक आशीष पॉल ने शास्त्रीय संगीत की परंपरा को जीवंत किया। बीना भट्ट ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई जबकि अमना मिर्ज़ा ने संचालन किया।
देहरादून की सांध्य बेला में सितार की तान और तबले की थाप के बीच जब शब्द और सुर गूंजे, तो वैली ऑफ वर्ड्स (Valley of Words) का पहला दिन अपने नाम कर गया। यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि संस्कृति, पीढ़ियों और रचनात्मक चेतना का जीवंत संवाद बनकर दून घाटी के हृदय में बस गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. तानिया सैली बक्शी एवं निकिता अग्रवाल सहित Valley of Words की टीम का विशेष सहयोग रहा।

 

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Chief Editor

Ravi Priyanshu

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