Budget 2026-27 में AI का बड़ा ऐलान: खेती से लेकर नौकरियों तक तकनीक पर भरोसा
New Delhi/Dehradun, 01 February: केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने यह साफ कर दिया है कि भारत का अगला विकास चरण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उभरती तकनीकों और स्किल-आधारित अर्थव्यवस्था के इर्द-गिर्द घूमेगा।
केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने Budget 2026-27 (बजट 2026) पेश करते हुए AI को केवल तकनीक नहीं, बल्कि “आम नागरिक की आकांक्षाओं को सशक्त करने वाला औज़ार” बताया। लेकिन सवाल यह है कि क्या भारत AI के लिए तैयार है, या सिर्फ़ उम्मीदों का बोझ AI पर डाल दिया गया है?
किसान + AI: डेटा खेत तक पहुँचेगा या फाइल तक?
Budget 2026-27 का सबसे चर्चित प्रस्ताव है “भारत–विस्तार”, एक बहुभाषीय AI टूल जिसे एग्रीस्टैक पोर्टल और ICAR के कृषि पैकेज के साथ जोड़ा जाएगा। यह टूल फिलहाल नीति-स्तर पर प्रस्तावित है और इसके ज़मीनी रोलआउट, टाइमलाइन और किसानों तक वास्तविक पहुंच को लेकर अभी कोई स्पष्ट रूपरेखा सामने नहीं आई है।
दावा है कि इससे:
- फसल की उत्पादकता बढ़ेगी
- किसानों के निर्णय बेहतर होंगे
- परामर्श आधारित खेती से जोखिम घटेगा
काग़ज़ पर यह कृषि क्षेत्र का डिजिटलीकरण है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि आज भी बड़ी संख्या में किसान डिजिटल प्लेटफॉर्म से कटे हैं, स्थानीय भाषा में तकनीकी सलाह की पहुंच सीमित है और भरोसे की सबसे बड़ी कड़ी — ग्राउंड-लेवल एक्सटेंशन सिस्टम — कमजोर है। ऐसे में AI तभी क्रांति बनेगा, जब मोबाइल नेटवर्क से लेकर कृषि सलाह तक की चेन मजबूत होगी। वरना यह योजना भी “पायलट प्रोजेक्ट” बनकर रह सकती है।
बजट 2026-27: युवाओं, उद्योग और बुनियादी ढांचे पर ध्यान
ऑरेंज इकॉनमी: 20 लाख नौकरियाँ — सपना या तैयारी?
Budget 2026-27 में Animation, Visual Effects, Gaming और Comics (AVGC) सेक्टर को भविष्य के रोजगार इंजन के रूप में पेश किया गया है।
प्रस्ताव है:
- 15000 माध्यमिक विद्यालयों में AVGC लैब
- 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर प्रयोगशालाएं
- मुंबई में भारतीय क्रिएटिव टेक्नोलॉजी संस्थान
सरकार का अनुमान है कि 2030 तक इस सेक्टर को 20 लाख पेशेवरों की जरूरत होगी। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या स्कूलों में आज पढ़ा रहे शिक्षक, आने वाले कल में गेमिंग और VFX की स्किल सिखाने के लिए तैयार हैं? इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना आसान है, लेकिन क्वालिटी ट्रेनर, इंडस्ट्री लिंक और रोजगार योग्य स्किल पैदा करना असली चुनौती है।
सबसे अहम सवाल यह है कि क्या ये AVGC लैब्स सीधे इंडस्ट्री हायरिंग और प्रोजेक्ट–आधारित ट्रेनिंग से जुड़ी होंगी, या यह भी ITI जैसी योजना बनकर काग़ज़ों में ही सीमित रह जाएँगी?
AI और नौकरियाँ: सरकार ने पहली बार खतरा माना
इस बजट की एक अहम स्वीकारोक्ति यह है कि AI और उभरती तकनीकें रोजगार के स्वरूप को बदल देंगी। इसीलिए “शिक्षा से रोजगार और उद्यम” पर एक उच्च स्तरीय स्टैंडिंग कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
यह कदम बताता है कि सरकार भी मानती है कि कुछ नौकरियाँ खत्म होंगी, इसके अलनावा आने वाली पीढ़ी में नई स्किल्स अनिवार्य होंगी और भारत का मौजूदा शिक्षा मॉडल दबाव में है, लेकिन कमेटी बनाना शुरुआत है। असल सवाल यह है — नीतिगत फैसले कब और कितनी तेज़ी से लिए जाएंगे?
डिज़ाइन शिक्षा: पूर्वी भारत को मौका, लेकिन कब असर?
पूर्वी भारत में नए राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान का प्रस्ताव क्षेत्रीय संतुलन की दिशा में सकारात्मक कदम है। डिज़ाइन इंडस्ट्री तेजी से फैल रही है, लेकिन यहां भी चुनौती वही है:
- इंडस्ट्री कनेक्ट
- ग्लोबल एक्सपोज़र
- और रोजगार से सीधा जुड़ाव
संस्थान बनेंगे, लेकिन क्या छात्र वहीं काम भी पाएंगे?
Budget 2026-27 का विज़न साफ़ है:
- भारत को AI-रेडी बनाना
- युवाओं को स्किल-आधारित रोजगार से जोड़ना
- और तकनीक को आम आदमी तक पहुँचाना
लेकिन भारत की सबसे बड़ी समस्या आज भी वही है — नीति और ज़मीन के बीच की दूरी।
अगर यह दूरी नहीं पाटी गई, तो:
- AI किसानों तक नहीं पहुँचेगा
- AVGC लैब्स खाली रह जाएँगी
- और कमेटियाँ रिपोर्ट तक सिमट जाएँगी
Budget 2026-27 भारत को भविष्य की ओर देखना सिखाता है, लेकिन उसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार वर्तमान की बुनियादी कमजोरियों को कितनी ईमानदारी से सुधारती है।
विज़न बड़ा है — अब परीक्षा अमल की है।
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