Dehradun Mock Drill: मानसून से पहले 7 संवेदनशील स्थानों पर आपदा राहत एवं बचाव तैयारियों की हुई व्यापक जांच
Dehradun | July 02, 2026
देहरादून, 2 जुलाई। मानसून के दौरान संभावित बाढ़, जलभराव और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए गुरुवार को देहरादून जिले के सात संवेदनशील स्थानों पर एक साथ व्यापक मॉकड्रिल आयोजित की गई। अभ्यास का उद्देश्य आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों, संसाधनों और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की क्षमता को परखना था।
सुबह 9:30 बजे जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को काल्पनिक सूचना मिली कि भारी बारिश के कारण जिले के सात क्षेत्रों में बाढ़, भूस्खलन और जलभराव की स्थिति बन गई है तथा कई लोग फंसे हुए हैं। सूचना मिलते ही जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देश पर इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम (IRS) सक्रिय किया गया। सभी नोडल अधिकारी कंट्रोल रूम पहुंचे, जबकि एसडीएम और इंसीडेंट कमांडरों ने रेस्क्यू टीमों को घटनास्थलों के लिए रवाना किया। सुबह 10:10 बजे तक सभी टीमें अपने-अपने स्थानों पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान में जुट गईं। पूरे अभियान की निगरानी अपर जिलाधिकारी के.के. मिश्रा कंट्रोल रूम से करते रहे।
सात स्थानों पर अलग-अलग परिदृश्यों का अभ्यास
सहस्रधारा-कार्लीगाड़ क्षेत्र में नदी का जलस्तर बढ़ने से टापू पर फंसे पर्यटकों के रेस्क्यू का अभ्यास किया गया। अभियान में 2 लोगों को मृत, 7 को गंभीर और 3 को सामान्य घायल मानते हुए सुरक्षित निकालकर अस्पताल भेजा गया।
ऋषिकेश के गौहरीमाफी क्षेत्र में चंद्रभागा, सुसवा और सौंग नदियों में बाढ़ आने की स्थिति बनाई गई, जिसमें 60-70 परिवारों को नाव और राफ्ट के जरिए सुरक्षित राहत शिविरों तक पहुंचाया गया। वहीं 8 घायलों को अस्पताल भेजने का अभ्यास किया गया।

विकासनगर के जमनीपुर-सहसपुर क्षेत्र में आसन और स्वर्णा नदी के उफान से जलभराव की स्थिति दर्शाई गई। प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया, जबकि 4 गंभीर घायलों को सीएचसी सहसपुर भेजा गया।
मसूरी के लंबीधार-किमाड़ी मार्ग पर भूस्खलन और बोल्डर गिरने से सड़क बंद होने की स्थिति बनाई गई। जेसीबी मशीनों से मलबा हटाकर मार्ग को सुचारू किया गया और फंसे वाहनों को सुरक्षित निकाला गया।
डोईवाला के दूधली क्षेत्र में 150 मिमी से अधिक वर्षा की काल्पनिक स्थिति में पहले बिजली आपूर्ति बंद की गई। इसके बाद रेस्क्यू टीमों ने जलभराव से 4 घायलों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया तथा 4 परिवारों को राहत शिविर में शिफ्ट किया।
चकराता-त्यूनी मार्ग पर धारनधार के पास भूस्खलन का अभ्यास किया गया। यात्रियों को पहले राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई और जेसीबी की मदद से करीब एक घंटे में मार्ग को दोबारा खोल दिया गया।
खामियां दूर करने के दिए निर्देश
मॉकड्रिल के बाद अपर जिलाधिकारी के.के. मिश्रा ने कहा कि पूर्वाभ्यास आपदा प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत होता है और उपलब्ध संसाधनों व उपकरणों की उपयोगिता का भी आकलन हो जाता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभ्यास के दौरान सामने आई कमियों और आवश्यक संसाधनों की सूची तैयार कर समय रहते उनकी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य और अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकें।
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