Dehradun Mock Drill के तहत 2 जुलाई को जिले के सात संवेदनशील स्थानों पर बाढ़, भूस्खलन, जलभराव और राहत-बचाव कार्यों का व्यापक अभ्यास किया जाएगा। प्रशासन ने अफवाहों से बचने और सहयोग करने की अपील की है।
Dehradun | July 01, 2026
मानसून के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए जिला प्रशासन 2 जुलाई को Dehradun Mock Drill आयोजित करेगा। इस दौरान जनपद के सात संवेदनशील स्थानों पर बाढ़, भूस्खलन, जलभराव, सड़क अवरोध और राहत एवं बचाव कार्यों से जुड़े विभिन्न आपदा परिदृश्यों का अभ्यास किया जाएगा। इसका उद्देश्य आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों की तैयारियों, आपसी समन्वय और उपलब्ध संसाधनों का परीक्षण करना है।
इन सात स्थानों पर होगी Dehradun Mock Drill
जिला प्रशासन के अनुसार मॉक ड्रिल के लिए जिले के सात संवेदनशील स्थानों का चयन किया गया है, जहां अलग-अलग संभावित आपदा स्थितियों के अनुसार राहत एवं बचाव अभियान का अभ्यास किया जाएगा।
- दूधली क्षेत्र
- सुसवा नदी एवं सोंग नदी तटीय क्षेत्र, गौहरीमाफी (ऋषिकेश)
- कार्लीगढ़ क्षेत्र
- लंबीधार–दृकिमाड़ी मोटर मार्ग (मसूरी)
- चकराता–मोरी मोटर मार्ग (तहसील चकराता)
- आसन एवं स्वर्णा नदी तटीय क्षेत्र, जमनीपुर (सहसपुर, विकासनगर)
- सहस्रधारा क्षेत्र (देहरादून)
इन सभी स्थानों पर संबंधित विभाग संभावित आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों का अभ्यास करेंगे।
सभी विभागों को पूरी तैयारी के निर्देश
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जनपद एवं तहसील स्तर पर गठित इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (IRS) में नामित अधिकारियों और सभी रेखीय विभागों को निर्धारित समय पर पूरी तैयारी के साथ मॉक ड्रिल में भाग लेने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि अभ्यास के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
जिलाधिकारी ने नागरिकों से अपील की है कि यह केवल मानसून आपदा प्रबंधन की तैयारियों का परीक्षण करने के लिए आयोजित अभ्यास है। इसलिए किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास न करें और न ही घबराएं। उन्होंने लोगों से प्रशासन का सहयोग करने और मॉक ड्रिल के दौरान संयम बनाए रखने की अपील की है।
मानसून सीजन में तैयारियों की होगी जांच
जिला प्रशासन का मानना है कि मानसून के दौरान अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए समय-समय पर इस तरह के अभ्यास आवश्यक हैं। इससे आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक तेज, सुरक्षित और समन्वित बनाया जा सकता है।
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