भारत–नेपाल की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बना गोरखा दशैं–दीपावली महोत्सव

Dehradun, 01 November: महेंद्र ग्राउंड, गढ़ी कैंट का वातावरण शनिवार शाम पूरी तरह गोरखाली संस्कृति के रंगों में डूब गया। गोरखा दशैं–दीपावली महोत्सव एवं राजकीय मेला–2025 की भव्य सांस्कृतिक संध्या ने दर्शकों को झूमने, मुस्कुराने और अपनी जड़ों से जुड़ने पर मजबूर कर दिया। ढोल–दमाऊं की थाप, पारंपरिक नृत्य, लोकगीतों की मधुर लय और भावनाओं से ओतप्रोत प्रस्तुतियों ने मेले को एक जीवंत सांस्कृतिक उत्सव में बदल दिया। वहीं, हास्य कलाकारों की चुटीली प्रस्तुतियों ने वातावरण में हंसी और उमंग का रंग भर दिया।

सांस्कृतिक संध्या की शुभारंभ पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित किया। इसके बाद बाल कलाकारों द्वारा प्रस्तुत ‘गुरु वंदना कत्थक नृत्य’ से हुई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इसके बाद सिंधुली महिला कलाकारों की टीम ने पारंपरिक ढोल–दमाऊं, ढोलक और थाली की थाप पर नृत्य प्रस्तुत कर सबका दिल जीत लिया।
मेले में शनिवार को हज़ारों की संख्या में लोग पहुंचे। पारंपरिक गोरखाली परिधानों, व्यंजनों और लोकधुनों से पूरा परिसर संस्कृति और उत्साह के रंगों में रंगा दिखाई दिया। कॉमेडी कलाकारों की चुटीली प्रस्तुतियों ने दर्शकों को ठहाकों से भर दिया और माहौल में नई ऊर्जा भर दी।

मुख्य आकर्षण रहा कलाकारों द्वारा प्रस्तुत ‘खुकरी डांस’, जिसकी ऊर्जावान प्रस्तुति ने पूरे मैदान में जोश भर दिया। वहीं वीर गोरखा कल्याण समिति की ओर से प्रस्तुत ‘कौड़ा डांस’ ने दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। अनुष्का, निशा और अन्य कलाकारों ने अपने शानदार नृत्य कौशल से खूब तालियाँ बटोरीं।
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इसके अलावा लाइव नेपाली बैंड सोनाली राय ने प्रसिद्ध गायक जुबिन दाई को समर्पित गीत ‘माया बैनी’ गाकर समां बाँध दिया। पारंपरिक संगीत और आधुनिक तालमेल के इस संगम ने सांस्कृतिक शाम को यादगार बना दिया। मेले में पारंपरिक व्यंजन, हस्तशिल्प, खेल और झूले वाले कई स्टॉल भी लगाए गए हैं, जिनमें स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों ने भी गहरी रुचि दिखाई।

वीर गोरखा कल्याण समिति के अध्यक्ष कमल थापा ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच बेटी-रोटी का अटूट संबंध है। यह महोत्सव उसी संबंध को सजीव बनाए रखने और हमारी साझा संस्कृति को संरक्षित करने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि महोत्सव में गढ़वाली, कुमाऊनी, जौनसारी और नेपाली संस्कृति का संगम देखने को मिल रहा है।

थापा ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे रविवार को होने वाले समापन समारोह में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक उत्सव का हिस्सा बनें।
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इस अवसर पर समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष उर्मिला तमांग, उपाध्यक्ष सूर्य बिक्रम शाही, महासचिव विशाल थापा, कोषाध्यक्ष व मीडिया प्रभारी टेकु थापा, सचिव देविन शाही, सह-सचिव आशु थापा, सांस्कृतिक सचिव देव कला दिवान, सह सांस्कृतिक सचिव करमिता थापा, संगठन मंत्री लोकेश बन, सदस्य सोनू गुरुंग, पूरन बहादुर थापा, यामु राना, सोना शाही, ज्योति राना, बबिता गुरुंग, एन.बी. थापा, बुद्धेश राई और मीन गुरुंग सहित बड़ी संख्या में समुदायजन उपस्थित रहे।.
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