गोरखा स्कूल के 100 साल: खिलाड़ियों ने दिया ₹56,890 का सहयोग
65 पूर्व नेशनल–इंटरनेशनल खिलाड़ियों ने बढ़ाया हाथ
डॉ. विरेंद्र सिंह रावत बोले — “यह उत्तराखंड की खेल–आत्मा है”
Dehradun, 11 November: शहर का ऐतिहासिक गोरखा मिलिट्री इंटर कॉलेज अपने 100 वर्ष पूरे कर रहा है। इस मौके पर स्कूल के 65 पूर्व नेशनल और इंटरनेशनल फुटबॉल खिलाड़ियों ने मिलकर ₹56,890 की राशि स्कूल प्रबंधन को भेंट की। यह धनराशि विद्यालय के विकास में उपयोग की जाएगी।
1925 में ब्रिटिश शासनकाल में स्थापित यह स्कूल गढ़ी कैंट स्थित है। अंग्रेज अधिकारियों ने इसे गोरखा ब्रिगेड के जवानों के बच्चों की शिक्षा और खेल के लिए शुरू किया था। एक समय में यहां 5–6 हजार छात्र पढ़ते थे और फुटबॉल इसका जुनून हुआ करता था।

गौरवशाली फुटबॉल विरासत
गोरखा स्कूल ने दो बार डुरंड कप और 1964–65 में सुब्रतो मुखर्जी इंटरनेशनल टूर्नामेंट जीता था। यहां से देश को कई सितारे मिले — श्याम थापा, सी.बी. थापा, अमर बहादुर गुरुंग, भूपेंद्र रावत, पदम बहादुर मल्ल, सुदेश गुरुंग आदि। महिला वर्ग में अंजना थापा, रक्षा पंवार, मोनिका बिष्ट और ज्योति गड़ीवाल जैसे नाम राष्ट्रीय स्तर पर चमके।
आर्मी से लीज़ खत्म, अदालत में मामला
स्कूल की लीज़ अवधि समाप्त हो चुकी है और अब सेना इसे अपने अधीन लेना चाहती है। मामला अदालत में लंबित है, जबकि स्कूल प्रबंधन ने सरकार से इसे अगले 100 वर्षों के लिए नवीनीकृत करने की मांग की है।पूर्व नेशनल खिलाड़ी और कोच डॉ. विरेंद्र सिंह रावत ने कहा कि गोरखा स्कूल केवल एक संस्था नहीं, बल्कि उत्तराखंड की खेल–आत्मा है। इसकी विरासत को बचाना हर खिलाड़ी का कर्तव्य है।
65 खिलाड़ियों का योगदान
योगदान देने वालों में राजेश खत्री, चेतन थपलियाल, संजीव अरोड़ा, विमल सिंह रावत, अरुण गुसाई, रणवीर सिंह गुसाई, मनीष गुरुंग, दीपक शर्मा, विजय खंडूरी, सुदेश गुरुंग, अमर थापा** सहित कई पूर्व छात्र शामिल रहे।
15–16 नवंबर को शताब्दी समारोह
विद्यालय प्रबंधन की ओर से ब्रिगेडियर पूरण सिंह गुरुंग, प्रिंसिपल दीपाली जुगरान, अध्यक्ष डी.बी. थापा ने 15–16 नवंबर को सांस्कृतिक कार्यक्रम और पूर्व खिलाड़ियों के सम्मान समारोह की घोषणा की है।

