CPI(M) ने उठाए महिलाओं की हत्या और अल्पसंख्यकों पर हमलों पर सरकार की चुप्पी पर सवाल
Dehradun, 05 February: भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था को लेकर पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि राज्य सरकार देवभूमि की पहचान को शांति और सद्भाव से हटाकर नफरत, हिंसा और अपराध की प्रयोगशाला में बदल रही है। माकपा के अनुसार अल्पसंख्यकों, महिलाओं और दलितों पर लगातार हमले हो रहे हैं, जबकि सरकार की चुप्पी से अपराधियों के हौसले बढ़े हैं।
पार्टी ने हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है। 31 जनवरी की रात ऋषिकेश के शिवाजी नगर में एम्स ऋषिकेश में कार्यरत 32 वर्षीय महिला की उनके घर के दरवाजे पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसी तरह 2 फरवरी को देहरादून के मच्छी बाजार में भरे बाजार में 23 वर्षीय युवती की चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी गई। माकपा ने बताया कि यह केवल पांच दिनों में देहरादून जिले की तीसरी ऐसी वारदात थी, जिससे महिलाओं में दहशत का माहौल है।

CPI(M) ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा का भी आरोप लगाया। पार्टी के अनुसार विकासनगर में दो निर्दोष कश्मीरी मुस्लिम बच्चों पर हमला किया गया, जिसमें एक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। वहीं कोटद्वार में बजरंग दल द्वारा एक बुजुर्ग मुस्लिम व्यापारी को उनकी 30 साल पुरानी दुकान का नाम बदलने का दबाव डाला गया। पार्टी का आरोप है कि जब हिंदू युवक दीपक कुमार ने इस अन्याय का विरोध किया तो बजरंग दल ने उनके घर पर हमला कर दिया, लेकिन हमलावरों पर कार्रवाई करने के बजाय दीपक कुमार के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी गई।
माकपा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर भी तीखा हमला करते हुए कहा कि उनके द्वारा लव जिहाद, लैंड जिहाद और थूक जिहाद जैसे भड़काऊ बयान दिए जा रहे हैं, जिससे समाज में नफरत फैल रही है। पार्टी का आरोप है कि ऐसे बयानों के कारण ही राज्य में सामाजिक तनाव और हिंसा बढ़ रही है।
CPI(M) की प्रमुख मांगें:
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बजरंग दल सहित सभी हमलावर संगठनों और हालिया हत्याओं के आरोपियों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए।
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मुख्यमंत्री के भड़काऊ और नफरत फैलाने वाले बयानों पर रोक लगाई जाए तथा उन्हें इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाए।
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राज्य में अल्पसंख्यकों, महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
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अन्याय का विरोध करने वाले दीपक कुमार जैसे साहसी नागरिकों को संरक्षण दिया जाए, न कि उन्हें दंडित किया जाए।
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उत्तराखंड में बढ़ते अपराध और महिलाओं की असुरक्षा की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
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