Green Technology: भविष्य की सतत ऊर्जा क्रांति

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Green Technology भविष्य की सतत ऊर्जा क्रांति

पूरा विश्व Green Technology पर कर रहा ध्यान केंद्रित

New Delhi, 10 September: तेज़ी से बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों ने दुनिया भर की सरकारों को नई दिशा में सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। अब ध्यान केंद्रित है Green Technology (ग्रीन टेक्नोलॉजी) पर— ऐसी तकनीक, जो ऊर्जा तो दे लेकिन पर्यावरण पर बोझ न डाले। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में यही तकनीक विकास की असली धुरी साबित हो सकती है।

Green Technology क्या है?

सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक Clean Technology का सीधा मतलब है ऐसी ऊर्जा और संसाधनों का इस्तेमाल, जिनसे प्रदूषण न फैले और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो। इसमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोगैस, हाइड्रो पावर जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को प्रमुखता दी जाती है।

क्यों बढ़ रही है Green Technology की मांग?

भारत सहित पूरी दुनिया में औद्योगिकीकरण और शहरीकरण की तेज़ रफ़्तार ने ऊर्जा खपत को कई गुना बढ़ा दिया है। कोयला और पेट्रोलियम जैसे पारंपरिक ऊर्जा स्रोत न केवल सीमित हैं, बल्कि इनके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन भी बढ़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही वजह है कि सरकारें और उद्योग अब क्लीन एनर्जी की ओर रुख कर रहे हैं।

Green Technology image
Green Technology पर पूरा विश्व कर रहा ध्यान केंद्रित

भारत में उठाए जा रहे कदम

  • भारत ने पिछले कुछ सालों में क्लीन एनर्जी की दिशा में कई पहल की हैं।
  • राष्ट्रीय सौर मिशन के तहत छतों पर सोलर पैनल लगाने की योजनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं।
  • तमिलनाडु और गुजरात जैसे राज्य पवन ऊर्जा उत्पादन में अग्रणी बनकर उभरे हैं।
  • सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर पेट्रोल-डीज़ल पर निर्भरता घटाने की कोशिश कर रही है।
  • ऊर्जा मंत्रालय का अनुमान है कि 2030 तक भारत अपनी कुल बिजली खपत का आधा हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से पूरा कर सकेगा।

वैश्विक परिदृश्य

वैश्विक परिदृश्य पर बात करें तो यूरोप और अमेरिका ने कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए बड़े पैमाने पर Sustainable Technology में निवेश किया है। चीन भी इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पेरिस समझौता और हालिया कॉन्फ्रेंस ऑफ़ पार्टीज़ समिट (COP Sumit) में यह साफ संकेत दिया गया कि बिना क्लीन टेक्नोलॉजी के जलवायु संकट से निपटना मुश्किल होगा।

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चुनौतियाँ भी मौजूद

  • हालांकि संभावनाएँ बड़ी हैं, पर समस्याएँ भी कम नहीं।
  • नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों की लागत अभी भी अधिक है।
  • स्टोरेज टेक्नोलॉजी यानी ऊर्जा को सहेज कर रखने की व्यवस्था पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई है।
  • ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में जागरूकता की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

भविष्य की तस्वीर

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारें, उद्योग जगत और आम लोग मिलकर इस दिशा में काम करें तो अगले दशक में ग्रीन टेक्नोलॉजी ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव ला सकती है। इसके ज़रिये न केवल प्रदूषण घटेगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। कुल मिलाकर Green Technology आज सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि समूचे विश्व की ज़रूरत बन चुकी है। भारत जैसे विकासशील देश अगर समय रहते इस राह पर तेज़ी से कदम बढ़ाते हैं तो आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य मिल सकता है।

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