भारत-चीन सीमा पर सामरिक मजबूती: बीआरओ ने मलारी घाटी में पूरा किया 69.69 किमी सड़क निर्माण
Dehradun, 29 October: भारत-चीन सीमा से सटे उत्तराखंड के चमोली जनपद की मलारी घाटी में अब सुरक्षा और विकास की नई राह खुल गई है। बर्फ से ढकी दुर्गम चोटियों और 17,000 फीट की ऊँचाइयों को चीरते हुए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने असंभव को संभव कर दिखाया है। संगठन ने सुमना से टोपीडुंगा तक 69.69 किलोमीटर लंबी सामरिक सड़क का निर्माण पूरा कर लिया है। यह कदम न केवल भारतीय सेना की पहुँच को नई गति देगी, बल्कि सीमांत जीवन में भी बदलाव का सेतु बनेगी। यह सड़क सिर्फ पत्थर और डामर का रास्ता नहीं, बल्कि भारत की सीमाओं पर अडिग संकल्प और इंजीनियरिंग कौशल की मिसाल है।

पहले यह सड़क केवल सुमना से लपथल (22 किमी) तक सीमित थी, लेकिन अब इसे आगे टोपीडुंगा तक विस्तारित किया गया है। बीआरओ के कमांडर अंकुर महाजन ने इस उपलब्धि की पुष्टि करते हुए बताया कि यह परियोजना बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पूरी की गई है।
करीब 230 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह सड़क 13,000 फीट से लेकर 17,341 फीट ऊंचाई तक की कठिन पर्वतीय श्रृंखलाओं को पार करती है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस सड़क के निर्माण से भारतीय सेना की त्वरित तैनाती, निगरानी और रसद आपूर्ति की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
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मलारी घाटी का बाड़ाहोती क्षेत्र पहले भी चीन की घुसपैठ की घटनाओं के कारण चर्चा में रहा है। ऐसे में यह नई सड़क सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सड़क निर्माण से न केवल सीमांत सुरक्षा को मजबूती मिली है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी विकास और आवाजाही के नए अवसर खुले हैं। दुर्गम इलाकों में अब परिवहन और व्यापार की संभावनाएं बढ़ने लगी हैं।
बीआरओ की यह उपलब्धि हिमालयी सीमाओं पर भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और रणनीतिक तत्परता का नया प्रमाण है।
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