PNG उपभोक्ताओं को छोड़ना होगा LPG कनेक्शन, सरकार का नया नियम
गैस की बढ़ती मांग को नियंत्रित करने और सप्लाई बेहतर करने के लिए लिया गया फैसला
Dehradun, 17 March: देश में रसोई गैस की बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने एलपीजी वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। नए संशोधित एलपीजी नियंत्रण आदेश के तहत अब उन उपभोक्ताओं को अपना घरेलू एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा, जिनके पास पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध है।
सरकार का मानना है कि इस कदम से गैस की मांग का दबाव कम होगा और उन क्षेत्रों में एलपीजी की आपूर्ति बेहतर हो सकेगी, जहां अभी PNG नेटवर्क नहीं पहुंच पाया है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार कई शहरों में ऐसे उपभोक्ता सामने आए हैं, जो PNG उपलब्ध होने के बावजूद एलपीजी सिलेंडर का भी उपयोग कर रहे हैं। इससे सप्लाई चेन पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इसी वजह से PNG वाले उपभोक्ताओं के लिए नए एलपीजी कनेक्शन जारी करने पर भी रोक लगा दी गई है।
सरकार लगातार PNG को एक स्वच्छ और सुविधाजनक ईंधन के रूप में बढ़ावा दे रही है। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के माध्यम से शहरी इलाकों में तेजी से PNG कनेक्शन दिए जा रहे हैं। उपभोक्ता ऑनलाइन पोर्टल, ईमेल या अन्य माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं।
डिजिटल सेवाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। गैस बुकिंग के लिए IVRS कॉल, SMS, व्हाट्सएप और मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार देश में करीब 87 प्रतिशत गैस बुकिंग अब डिजिटल माध्यम से हो रही है।
एलपीजी की सप्लाई को सुचारू बनाए रखने के लिए सरकार ने निगरानी भी कड़ी कर दी है। कई राज्यों में जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए छापेमारी अभियान चलाए जा रहे हैं, जबकि 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं।
पर्याप्त है ईंधन का स्टॉक
सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे घबराएं नहीं और अनावश्यक बुकिंग से बचें।
उत्तराखंड में PNG का दायरा सीमित
उत्तराखंड में अभी भी अधिकांश परिवार एलपीजी पर निर्भर हैं। राज्य में करीब 26 लाख से अधिक एलपीजी उपभोक्ता हैं, जिनमें लगभग 5.3 लाख उज्ज्वला योजना के लाभार्थी हैं। वहीं PNG कनेक्शन की संख्या अभी सीमित है और करीब 82 हजार उपभोक्ता ही इस सुविधा का उपयोग कर रहे हैं।
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