यूपीईएस में जगजीत सिंह की ग़ज़लों को मिली नई आवाज़
Dehradun, 16 October: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित यूपीईएस यूनिवर्सिटी में विरासत की ओर से आयोजित टॉक शो ‘जगजीत सिंह का जीवन और ग़ज़लें’ ने संगीतप्रेमियों को एक भावनात्मक सफ़र पर ले गया। कार्यक्रम में ग़ज़ल सम्राट जगजीत सिंह के जीवन और संगीत की विरासत पर जाने-माने पत्रकार राजेश बादल और लेखक शशि केसवानी ने अपने अनुभव साझा किए।
टॉक शो की शुरुआत जगजीत सिंह के पहले डिजिटल एल्बम, जो लंदन में रिकॉर्ड किया गया था, की चर्चा से हुई। वक्ताओं ने बताया कि कैसे टीम रातभर सुरों को निखारती थी और हर धुन को परिपूर्ण बनाने में जुनून झलकता था।
शशि केसवानी ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘कहाँ तुम चले गए’ का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह केवल संगीत यात्रा का वृत्तांत नहीं, बल्कि जीवन के अर्थ खोजने की कहानी है। वहीं राजेश बादल ने जगजीत सिंह के बचपन और संगीत के प्रति उनके अनुशासनपूर्ण समर्पण के प्रेरक किस्से सुनाए। उन्होंने बताया कि किस तरह उनके गुरु ने बॉलीवुड की धुन गाने पर नाराज़गी जताई थी, लेकिन वही जिज्ञासा आगे चलकर उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रतीक बनी।
कार्यक्रम में चित्रा सिंह से उनकी मुलाकात और दोनों की साझी संगीत यात्रा पर भी विस्तार से चर्चा हुई। ‘बात निकलेगी तो दूर तक जाएगी’ और ‘समवन समव्हेयर’ जैसे एल्बमों को 1980 के दशक में भारतीय संगीत का मील का पत्थर बताया गया।
टॉक शो का समापन दून स्कूल में जगजीत सिंह के अंतिम लाइव प्रदर्शन की प्रस्तुति के साथ हुआ। वही मंच, जहाँ से उन्होंने अपनी आख़िरी ग़ज़ल सुनाई थी। जिसके कुछ ही समय बाद संगीत जगत ने अपनी सबसे गूंजती आवाज़ खो दी थी।
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