चारधाम यात्रा 2026: मोबाइल-कैमरा प्रतिबंध समेत कई सख्त फैसलों पर तेज हुई राज्य में बहस
Dehradun, 05 February: चारधाम यात्रा 2026 से पहले उत्तराखंड सरकार और मंदिर प्रशासन ने कई अहम और सख्त फैसले लिए हैं, जिनका सीधा असर यात्रा व्यवस्था और धार्मिक अनुशासन पर पड़ेगा। मंदिर परिसरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक, मोबाइल फोन और कैमरों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध जैसे निर्णयों ने राज्य में नई बहस को जन्म दे दिया है। सरकार का कहना है कि ये फैसले श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और धार्मिक मर्यादाओं की रक्षा को ध्यान में रखकर लिए गए हैं।
क्यों लिया गया सख्त फैसला
चारधाम यात्रा के दौरान हर साल बढ़ती भीड़, सुरक्षा चुनौतियों और अव्यवस्था की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने इस बार पहले से कड़े कदम उठाने का फैसला किया है। अधिकारियों का कहना है कि मंदिर परिसरों में अनुशासन बनाए रखना और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचना जरूरी हो गया है, इसी कारण नियमों को स्पष्ट और सख्त किया गया है।
47 मंदिरों में लागू होगा नियम
उत्तराखंड के पौराणिक मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर लंबे समय से मांग उठती रही है। इसकी शुरुआत हरिद्वार में हरकी पैड़ी को लेकर हुई थी, जहां धार्मिक संस्थाओं ने इसे आस्था और परंपरा से जोड़कर देखा। अब बदरी-केदार मंदिर समिति ने अपने अधीन आने वाले 47 मंदिरों और धार्मिक स्थलों में इस प्रतिबंध को लागू करने का निर्णय लिया है। गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर समितियों ने भी अपने-अपने धामों में यही नियम लागू करने की घोषणा की है।
मोबाइल और कैमरा पूरी तरह प्रतिबंधित
चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर हुई हालिया समीक्षा बैठकों में यह भी तय किया गया कि मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन और कैमरों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन का मानना है कि मोबाइल और कैमरों के कारण भीड़ रुकती है, सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है और कई बार अफरा-तफरी की स्थिति बन जाती है। प्रतिबंध से दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
धार्मिक मर्यादा और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। सरकार के अनुसार सभी फैसले श्रद्धालुओं की जान-माल की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन और धार्मिक मर्यादाओं के संरक्षण को ध्यान में रखकर लिए गए हैं।
बढ़ती भीड़ बनी बड़ी चुनौती
पिछले कुछ वर्षों में चारधाम यात्रा में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। सीमित भौगोलिक क्षेत्र, संकरी सड़कें और मौसम की चुनौती के बीच यात्रा संचालन प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी बन चुका है। अधिकारियों का कहना है कि नियमों में सख्ती इसी दबाव का परिणाम है।
समाज में उठ रहे सवाल
इन फैसलों के बाद समाज के विभिन्न वर्गों से प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक स्थलों की पवित्रता और अनुशासन बनाए रखने की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ वर्ग इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं। यही कारण है कि यह मुद्दा अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक बहस का रूप ले चुका है।
यात्रा से पहले और होंगे स्पष्ट निर्देश
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले नियमों को लेकर विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि फैसलों का पालन ज़मीन पर प्रभावी ढंग से हो और श्रद्धालुओं को अनावश्यक परेशानी न हो।
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