ग्रीन सेस: राज्य में प्रदूषण नियंत्रण और हरित अवसंरचना के लिए ऐतिहासिक पहल
Dehradun, 27 October: उत्तराखंड अब हरियाली की ओर एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। राज्य के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को घोषणा की कि प्रदेश में जल्द ही “ग्रीन सेस” लागू किया जाएगा। यह शुल्क उन वाहनों से वसूला जाएगा जो अन्य राज्यों से उत्तराखंड की सीमाओं में प्रवेश करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम राज्य को स्वच्छ, हरित और प्रदूषण-मुक्त बनाने की दिशा में एक ठोस प्रतिबद्धता है। ग्रीन सेस से प्राप्त धनराशि का उपयोग वायु गुणवत्ता सुधार, सड़क धूल नियंत्रण, हरित अवसंरचना निर्माण और स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन जैसी परियोजनाओं में किया जाएगा।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूकेपीसीबी) के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि हालिया सर्वेक्षण में देहरादून में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण सड़क की धूल पाई गई है, जो कुल प्रदूषण का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा है। वहीं वाहन उत्सर्जन केवल सात प्रतिशत तक सीमित है। उन्होंने कहा कि ग्रीन सेस से सड़क धूल नियंत्रण और स्वच्छ वाहन नीति को बढ़ावा मिलेगा, जिससे राज्य के प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।
होगी 100 करोड़ की अतिरिक्त आय
सरकार का अनुमान है कि इस नीति से हर वर्ष लगभग 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी, जिसे वायु निगरानी, हरित क्षेत्र विस्तार और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम के विकास में लगाया जाएगा।
इलेक्ट्रिक वाहनों को छूट
ग्रीन सेस केवल बाहरी राज्यों के पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों पर लागू होगा, जबकि इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन, सौर और बैटरी चालित वाहनों को इससे छूट दी जाएगी। गौरतलब है कि भारत सरकार के “स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2024” में उत्तराखंड के शहरों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था। सर्वेक्षण में ऋषिकेश 14वें और देहरादून 19वें स्थान पर रहा। सरकार को उम्मीद है कि ग्रीन सेस नीति से यह उपलब्धि और मजबूत होगी।
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