Uttarakhand Tourism: बारिश और आपदाओं ने छीनी पर्यटन कारोबार की रौनक
Dehradun, 24 September: मसूरी से लेकर नैनिताल तक… बारिश ने उत्तराखंड के पर्यटन कारोबार की सांसें रोक दी हैं। सैलानी जहाँ पहले छुट्टियों में पहाड़ों की तरफ भागते थे, वहीं अब डर और आपदा की आशंका ने उन्हें रोक दिया है। नतीजा: खाली कमरे, टूटे रास्ते और करोड़ों का नुकसान।
उत्तराखंड की पहचान पर्यटन और तीर्थाटन से है। हर साल लाखों लोग मसूरी, नैनीताल और ऋषिकेश की खूबसूरती देखने आते हैं तो करोड़ों श्रद्धालु चारधाम यात्रा के लिए राज्य पहुंचते हैं। लेकिन बीते तीन वर्षों से लगातार भारी बारिश और आपदाओं ने इस उद्योग पर गंभीर चोट पहुँचाई है। इस बार भी मानसून सीजन ने होटल कारोबारियों, टूर ऑपरेटरों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गहरा असर छोड़ा।
स्थानीय होटल व्यवसायियों के अनुसार, बारिश और भूस्खलन की वजह से सड़कों पर आवाजाही मुश्किल हो गई है। कई जगहों पर मार्ग अवरुद्ध हैं, जिससे आने-जाने वाले पर्यटकों की संख्या घट गई है। नतीजतन, कई होटल लगभग खाली पड़े हैं और कारोबारियों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ा है।
30 प्रतिशत से भी नीचे गया आंकड़ा

व्यवसायियों का कहना है कि जहां सितंबर और अक्टूबर में बुकिंग का स्तर सामान्यत: 70 से 80 प्रतिशत रहता है, वहीं इस बार यह 30 प्रतिशत से भी नीचे चला गया है। कई रिसॉर्ट संचालकों ने बताया कि मौसम की मार से उनका स्टाफ भी प्रभावित हुआ है, क्योंकि होटल बंद रहने से रोज़गार पर असर पड़ रहा है।
बारिश और आपदा का सीधा असर
मानसून के दौरान इस साल देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग और चमोली जैसे जिलों में कई बार बादल फटे और भूस्खलन हुआ। नतीजा यह हुआ कि सड़कों पर आवाजाही बाधित रही और कई दिनों तक पर्यटक गंतव्य स्थल तक नहीं पहुँच पाए।
- मसूरी और नैनीताल में होटल बुकिंग्स का 40–50% तक कैंसिलेशन हुआ।
- स्थानीय कारोबारी संगठनों के अनुसार जुलाई-अगस्त में होटल ओक्युपेंसी 25–30% तक ही सिमटी रही।
- कई छोटे होटल और होम-स्टे सीजनभर खाली पड़े रहे।
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चारधाम यात्रा में रिकॉर्ड भीड़
- हालांकि मनोरंजन पर्यटन (Leisure Tourism) प्रभावित रहा, लेकिन चारधाम यात्रा 2024 ने रिकॉर्ड बनाया।
- राज्य सरकार के अनुसार इस साल लगभग 47 लाख श्रद्धालु बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम पहुंचे।
- यह संख्या 2023 की तुलना में अधिक है, जब बारिश और मार्ग अवरुद्ध होने की वजह से यात्रियों की संख्या घटी थी।
- SDC Foundation की रिपोर्ट बताती है कि पहले ही 100 दिनों में 30 लाख से अधिक श्रद्धालु धामों तक पहुँच चुके थे।
चारधाम यात्रा की यह सफलता दिखाती है कि धार्मिक पर्यटन पर मौसम का उतना गहरा असर नहीं पड़ा, जितना होटल-आधारित पर्यटन पर पड़ा।

उद्योग पर आर्थिक असर
पर्यटन उद्योग उत्तराखंड की जीडीपी में लगभग 10–12% का योगदान देता है। लेकिन बारिश और आपदाओं की वजह से पिछले तीन साल में राजस्व में गिरावट दर्ज की गई है।
- 2022 में पर्यटन से लगभग ₹9,500 करोड़ का अनुमानित राजस्व आया।
- 2023 में यह घटकर लगभग ₹7,200 करोड़ रह गया।
- 2024 में हालांकि तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ी, लेकिन होटल कारोबार प्रभावित होने के चलते राजस्व करीब ₹6,500 करोड़ ही रहा।
- अनुमानित पर्यटन राजस्व 2025 में भी लगभग ₹6,500–7,000 करोड़ तक सीमित रहने की संभावना है।
यानी, पर्यटक संख्या और राजस्व दोनों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के बावजूद होटल कारोबारियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला।
कारोबारियों की मांग
- होटल और रेस्तरां संचालकों का कहना है कि लगातार बारिश और आपदाओं से उनका कारोबार साल-दर-साल प्रभावित हो रहा है।
- कई होटल एसोसिएशनों ने राज्य सरकार से टैक्स रियायत और राहत पैकेज की मांग की है।
- कारोबारियों का कहना है कि उन्हें आपदा राहत की श्रेणी में लाना चाहिए क्योंकि हर साल उनका सीधा नुकसान होता है।
- अगर स्थिति नहीं सुधरी तो छोटे होटल और होम-स्टे बंद होने की कगार पर पहुँच सकते हैं।
उत्तराखंड सरकार ने स्थिति सुधारने के लिए कुछ कदम उठाए हैं:
- विंटर चारधाम यात्रा शुरू करने की योजना, ताकि पूरे साल धार्मिक पर्यटन चलता रहे।
- साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) जैसे ट्रैकिंग, राफ्टिंग और स्कीइंग को प्रमोट करने की रणनीति।
- सड़क और पुलों की मरम्मत के लिए आपदा प्रबंधन को अतिरिक्त बजट।
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक राज्य में सस्टेनेबल टूरिज्म (Sustainable Tourism) और आपदा-रोधी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित नहीं होगा, तब तक हर साल बारिश पर्यटन उद्योग को झटका देती रहेगी।
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स्रोत (References):
-
Uttarakhand Tourism Department – Market Research & Statistics
-
Times of India: “Uttarakhand’s tourism boom: 6 crore visitors…”
-
Economic Times: “Uttarakhand hoteliers seek tax rebates…”
-
SDC Foundation: Char Dham Yatra 2024 Mid-Term Report
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