चार श्रम संहिताओं, निजीकरण और एलिवेटेड रोड परियोजना के विरोध में गांधी पार्क से सचिवालय तक रैली, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा जाएगा
Dehradun, 10 February: केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर उत्तराखंड संयुक्त ट्रेड यूनियन संघर्ष समिति ने 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए कमर कस ली है। इस सिलसिले में मंगलवार को देहरादून में आयोजित प्रेस वार्ता में सीटू, इंटक, एटक सहित विभिन्न श्रमिक संगठनों और यूनियनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए इंटक के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट, सीटू के प्रांतीय महामंत्री राजेन्द्र सिंह नेगी, एटक के प्रांतीय महामंत्री अशोक शर्मा, सीटू के प्रांतीय सचिव लेखराज और बस्ती बचाओ आंदोलन के संयोजक अनंत आकाश ने केंद्र सरकार की श्रम नीतियों पर तीखा हमला बोला।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार श्रम संहिताएँ लागू करने की प्रक्रिया शुरू की गई, जिन्हें प्रधानमंत्री द्वारा 21 नवंबर 2025 से लागू करने की घोषणा की गई। उनका कहना था कि इन श्रम संहिताओं के लागू होने से श्रमिकों के अधिकार समाप्त होंगे और पूंजीपतियों को खुली छूट मिल जाएगी।
संयुक्त ट्रेड यूनियन संघर्ष समिति ने ऐलान किया कि 12 फरवरी को गांधी पार्क से राज्य सचिवालय तक रैली निकालकर प्रदर्शन किया जाएगा और जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया जाएगा।
वहीं एलिवेटेड रोड परियोजना के विरोध में बस्तीवासी भी सचिवालय कूच में शामिल होंगे।
संयुक्त ट्रेड यूनियन संघर्ष समिति की प्रमुख मांगें
- चार श्रम संहिताएँ और 12 घंटे कार्य आदेश रद्द किए जाएँ
- मोटरयान अधिनियम 2023 एवं भारतीय न्याय संहिता की विवादित धाराएँ वापस हों
- न्यूनतम वेतन ₹26,000 मासिक घोषित किया जाए
- आंगनबाड़ी, आशा व भोजनमाता कर्मियों को नियमित कर्मचारियों जैसा मानदेय
- स्मार्ट मीटर और एलिवेटेड रोड जैसी जनविरोधी योजनाएँ रद्द हों
- पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए
- संविदा/दैनिक कर्मचारियों को नियमित या समान वेतन
- सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक
- चाय बागान श्रमिकों को भूमि अधिकार और ग्रेच्युटी
- परिवहन निगम को आर्थिक पैकेज और सेवानिवृत्त कर्मियों को भुगतान
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