कृषि वानिकी से बदलेगा पहाड़ का भविष्य, देहरादून में तीन दिवसीय प्रशिक्षण ने दी नई राह
Dehradun, 26 September: भूमि के बेहतर उपयोग, सतत आय सृजन और पारिस्थितिक संतुलन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विस्तार प्रभाग, आईसीएफआरई–वन अनुसंधान संस्थान (FRI), देहरादून द्वारा “भूमि प्रबंधन हेतु कृषि वानिकी प्रजातियों की खेती” विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण का सफल आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण 23 से 25 सितम्बर 2025 तक हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर (उत्तराखंड) में CAMPA–विस्तार–वन विज्ञान केंद्र परियोजना के अंतर्गत आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रकाश सिंह ने किया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने कहा कि एग्रोफॉरेस्ट्री (कृषि वानिकी) भूमि प्रबंधन का एक प्रभावी साधन है, जो मृदा संरक्षण, सतत आय के स्रोत, ईंधन, चारा, लकड़ी, खाद्य पदार्थों और अन्य दैनिक जरूरतों की पूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
तीन दिनों तक चले तकनीकी सत्र में वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून और एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय के विषय विशेषज्ञों ने एग्रोफॉरेस्ट्री की व्यावसायिक संभावनाओं, मृदा संरक्षण और कीट एवं फफूंद संक्रमण से वृक्षों और फसलों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत व्याख्यान दिए। ये व्याख्यान नवीनतम शोध निष्कर्षों और उत्तराखंड सहित हिमालयी क्षेत्रों के सफल केस स्टडीज़ पर आधारित थे।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय की नर्सरी का भ्रमण भी कराया गया, जहां उन्हें ईंधन, चारा, लकड़ी, खाद्य और उपयोगी गैर-काष्ठ वनोपजों से जुड़ी महत्वपूर्ण एग्रोफॉरेस्ट्री प्रजातियों के पौधों की जानकारी दी गई।
इस प्रशिक्षण में 60 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों में महिला कृषक, स्वयं सहायता समूह के सदस्य और छात्र शामिल रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में FRI देहरादून की टीम में डॉ. चरण सिंह, लोकिंदर शर्मा, पवन देवशाली, नवीन और अमित सिंह के साथ एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ टीम में प्रो. ए.के. नेगी, डॉ. डी.एस. चौहान, डॉ. आर.एस. नेगी, डॉ. एल.एस. कंडारी और डॉ. हिमशिखा गोसाईं का योगदान रहा।
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