पूर्व मुख्यमंत्री B. C. Khanduri का निधन, उत्तराखंड ने खोया अनुशासन और सादगी का बड़ा चेहरा

नहीं रहे पूर्व मुख्यमंत्री B. C. Khanduri

पूर्व मुख्यमंत्री B. C. Khanduri ने मैक्स अस्पताल में ली अंतिम सांस, लंबे समय से थे अस्वस्थ

Dehradun, 19 May: उत्तराखंड की राजनीति से मंगलवार को एक ऐसा नाम हमेशा के लिए विदा हो गया, जिसे लोग सादगी, अनुशासन और ईमानदार प्रशासन की पहचान मानते थे। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता B. C. Khanduri का निधन हो गया। उन्होंने देहरादून के मैक्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे खंडूरी के निधन की खबर मिलते ही प्रदेशभर में शोक की लहर फैल गई।

सेना की वर्दी से शुरू हुआ सार्वजनिक जीवन

भुवन चंद्र खंडूरी का जीवन हमेशा अनुशासन और जिम्मेदारी के इर्द-गिर्द घूमता रहा। देहरादून में जन्मे B. C. Khanduri ने पढ़ाई पूरी करने के बाद भारतीय सेना की इंजीनियरिंग कोर जॉइन की। करीब साढ़े तीन दशक तक सेना में सेवाएं देने के दौरान उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। 1971 के युद्ध के समय भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई। बेहतरीन सेवाओं के लिए उन्हें ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ से सम्मानित किया गया था।

मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति की राह चुनी, लेकिन उनकी कार्यशैली में सैन्य अनुशासन हमेशा दिखाई देता रहा।

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राजनीति में अलग पहचान बनाने वाले नेता

राजनीति में आने के बाद खंडूरी ने जल्द ही अपनी अलग छवि बना ली। वे उन नेताओं में गिने गए जो कम बोलते थे, लेकिन फैसलों में सख्त माने जाते थे। 1991 में पहली बार गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद बनने के बाद उनका राजनीतिक सफर लगातार आगे बढ़ता गया।

भाजपा संगठन में उन्हें नीतिगत राजनीति करने वाले नेताओं में माना जाता था। उनकी छवि ऐसे नेता की रही जो दिखावे की राजनीति से दूर रहते थे और प्रशासनिक पारदर्शिता पर जोर देते थे।

केंद्र में सड़क विकास को दी नई दिशा

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्हें सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। देशभर में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने वाली ‘गोल्डन क्वाड्रिलेटरल’ परियोजना को गति देने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है। राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजनाओं में उनके काम को आज भी याद किया जाता है।

मुख्यमंत्री रहते दिखाई सख्त कार्यशैली

उत्तराखंड बनने के बाद खंडूरी दो बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश देने की कोशिश की गई। अधिकारियों के बीच उनकी छवि अनुशासन पसंद मुख्यमंत्री की रही।

सड़क विकास, प्रशासनिक सख्ती और पारदर्शिता को लेकर उन्होंने कई फैसले लिए। भाजपा ने भी सरकार की छवि सुधारने के लिए एक बार फिर उन पर भरोसा जताया था।

राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहा परिवार

खंडूरी परिवार आज भी उत्तराखंड की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उनकी पुत्री Ritu Khanduri Bhushan वर्तमान में उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष हैं और राज्य की पहली महिला स्पीकर बनने का इतिहास रच चुकी हैं। वहीं उनके पुत्र मनीष खंडूरी भी राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं।

उत्तराखंड की राजनीति में हमेशा जिंदा रहेगा नाम

B. C. Khanduri को सिर्फ एक राजनेता के तौर पर नहीं, बल्कि एक अनुशासित प्रशासक के रूप में भी याद किया जाएगा। उत्तराखंड की राजनीति में उनका नाम उन नेताओं में लिया जाता रहेगा जिन्होंने सादगी और ईमानदारी को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया।

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