दून विश्वविद्यालय छात्रों की प्रस्तुतियों में झलकी उत्तराखंड की लोक विरासत
Dehradun, 31 October: उत्तराखंड रजत जयंती वर्ष के अवसर पर दून विश्वविद्यालय का परिसर लोक संस्कृति के रंगों में नहा उठा। लोकगीत, लोकनृत्य और शास्त्रीय नृत्य प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार की सांस्कृतिक परंपराओं को मंच पर सजीव रूप में प्रस्तुत किया। पारंपरिक वेशभूषा, ढोल–दमाऊं की गूंज और लोकधुनों की मधुर लय ने पूरे परिसर को देवभूमि की लोक-सुगंध से महका दिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और युवाओं में परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना जागृत करना था। प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियों में पर्वतीय लोक जीवन की सरलता, सामूहिकता और रीति-रिवाजों की सुंदर झलक दिखाई। दर्शक भी इन मनमोहक प्रस्तुतियों पर झूम उठे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति हमारी पहचान है। ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने और सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने का माध्यम हैं। संयोजक प्रो. राजेश कुमार ने विद्यार्थियों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि इस आयोजन ने विवि परिवार में सांस्कृतिक एकता का भाव और भी मजबूत किया है।
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सह-संयोजक डा. चेतना पोखरियाल ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और आत्मविश्वास को प्रोत्साहित करती हैं। डीएसडब्ल्यू. प्रो. एचसी पुरोहित ने लोककला को सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत की धरोहर बताया, जबकि कुलसचिव दुर्गेश डिमरी ने कहा कि सांस्कृतिक गतिविधियां विद्यार्थियों में रचनात्मकता और संवेदनशीलता को बढ़ाती हैं कार्यक्रम में डा. अजीत पंवार, डा. कैलाश कंडवाल, डा. मानवेंद्र बर्त्वाल सहित अनेक संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
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