‘ड्रग फ्री कैंपस’ की मुहिम तेज़: एक्शन मोड में देहरादून प्रशासन
Dehradun, 10 October: उत्तराखंड की राजधानी के यूनिवर्सिटी और कॉलेज अब नशे के कारोबारियों के लिए ‘नो एंट्री ज़ोन’ बनने जा रहे हैं। “ड्रग्स फ्री देवभूमि” के लक्ष्य को साकार करने के लिए देहरादून जिला प्रशासन ने व्यापक रणनीति के साथ मोर्चा संभाल लिया है। जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में गुरुवार को ऋषिपर्णा सभागार में हुई जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति की बैठक में नशे के खिलाफ कई सख्त और ठोस निर्णय लिए गए।

दर्ज किए जाएंगे संगीन धाराओं में मुकदमे
डीएम बंसल ने बैठक में साफ कहा कि राजधानी में नशा तस्करों के लिए कोई जगह नहीं होगी और नशे के कारोबार में लिप्त लोगों पर अब मौके पर ही संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि प्रशासन नशे के अवैध कारोबार को जड़ से समाप्त करने के लिए किसी भी हद तक जाएगा।
उन्होंने दवा फैक्ट्रियों और मेडिकल स्टोर्स की सघन जांच के निर्देश देते हुए कहा कि नशीले पदार्थों की रोकथाम के लिए निरंतर निगरानी रखी जाए और सभी मेडिकल स्टोरों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। डीएम ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पर्याप्त संख्या में ड्रग्स टेस्टिंग किट खरीदे जाने और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की मदद से जिले के सभी सरकारी व गैर सरकारी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों तथा उच्च शिक्षण संस्थानों में बड़े पैमाने पर ड्रग्स टेस्टिंग कराने के निर्देश दिए। इसके लिए उन्होंने मौके पर ही फंड स्वीकृत किया।
डेडिकेटेड सेल की स्थापना की प्रक्रिया शुरू
नशे के खिलाफ इस अभियान को जनसहभागिता से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन ने पब्लिक हेल्पलाइन नंबर और डेडिकेटेड सेल की स्थापना की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही, स्कूलों में गठित एंटी ड्रग्स समितियों को सीधे एसटीएफ से जोड़ने के निर्देश दिए गए ताकि सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
नियमित रिपोर्ट भेजने के निर्देश
बैठक के दौरान डीएम ने समाज कल्याण अधिकारी को निर्देश दिए कि रायवाला स्थित ओल्ड एज होम को शीघ्र नशा मुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में संचालित किया जाए। इसके अलावा, सभी नशा मुक्ति केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण करने और उनकी गतिविधियों की नियमित रिपोर्ट स्थानीय प्रशासन को भेजने के निर्देश भी दिए गए।
संभावित नशे के क्षेत्रों को किया जाएगा चिन्हित
डीएम बंसल ने विद्यालयों के आसपास संभावित नशे के क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां सीसीटीवी कैमरे लगाने, शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग्स कमेटियों को सक्रिय करने, तथा “मानस” हेल्पलाइन नंबर 1933 और एनसीवी मानस पोर्टल का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन पर आने वाली प्रत्येक शिकायत पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि नशे के अवैध कारोबार को जड़ से खत्म किया जा सके।
ड्रग्स टेस्टिंग की जाएगी
जिलाधिकरी ने यह भी कहा कि मादक पदार्थों की मांग और सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए एएनटीएफ, एसटीएफ, पुलिस, एनसीबी और औषधि नियंत्रक विभाग संयुक्त रूप से प्रभावी कार्रवाई करेंगे। यातायात जांच के दौरान भी ड्रग्स टेस्टिंग की जाएगी और गांव-गांव में आशा कार्यकत्रियों, आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्प्रभावों से जागरूक किया जाएगा।
बैठक में डीएफओ मयंक गर्ग, अपर जिलाधिकारी प्रशासन जय भारत सिंह, एसडीएम हरिगिरी, स्मृता परमार, अपर्णा ढौड़ियाल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार शर्मा, जिला आबकारी अधिकारी वीरेन्द्र कुमार जोशी, समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, ड्रग्स इंस्पेक्टर विनोद जगूड़ी, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल भारती सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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