स्कूलों में उठता धुआं: सुरक्षा में लापरवाही की आग
विशेष रिपोर्ट: रवि प्रियांशु
Dehradun, 16 October: देहरादून एक बार फिर आग की लपटों से दहला गया है। गुरुवार सुबह भानियावाला स्थित श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल में आग लग गई। सुबह करीब 5 बजे स्थानीय लोगों ने स्कूल की बिल्डिंग से धुआं उठता देखा और तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना दी। कुछ ही देर में आग ने स्कूल के कई कमरों को अपनी चपेट में ले लिया। सौभाग्य से घटना के समय स्कूल बंद था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

फायर ब्रिगेड की टीम ने मौके पर पहुंचकर घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक फर्नीचर, दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जलकर राख हो चुके थे। आग लगने की संभावित वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। एहतियात के तौर पर स्कूल में एक दिन का अवकाश घोषित किया गया है।
3 सितंबर को भी घटी थी ऐसी घटना
महज कुछ दिन पहले, 3 सितंबर को इंदिरा नगर स्थित श्री चैतन्य टेक्नो इंटरनेशनल स्कूल (पूर्व में गौतम इंटरनेशनल सीनियर सेकेंड्री) में भी इसी तरह की घटना हुई थी। 700 से 800 बच्चे स्कूल में मौजूद थे, जब अचानक एक कमरे से धुआं उठने लगा। वह कमरा बच्चों की नई स्कूल यूनिफॉर्म से भरा हुआ था।
फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंचकर सभी बच्चों को सुरक्षित निकाला, लेकिन इस घटना ने स्कूलों की फायर सेफ्टी तैयारियों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया था।
2023 का त्यूणी अग्निकांड: चेतावनी जो अनसुनी रह गई
बीते अप्रैल 2023 में त्यूणी में आग लगने से चार मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हुई थी। उस वक़्त शासन-प्रशासन ने कहा था कि फायर सर्विस को “अपग्रेड” किया जाएगा। लेकिन आज की घटनाएँ दिखाती हैं कि हालात अब भी नहीं बदले।
लाखों की आबादी पर सिर्फ 9 फायर टेंडर
देहरादून फायर सर्विस की बात करें तो राजधानी में 20 लाख से ज़्यादा की आबादी के लिए सिर्फ 30 फायर वाहन हैं। जिनमें से पूरी तरह ऑपरेशनल फायर टेंडर मात्र 9 हैं। बीते 8 अक्टूबर को दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट में दिया यह आंकड़ा खुद बताता है कि सिस्टम कितना कमजोर है।
फायर विभाग के पास उपलब्ध संसाधन:
- फायर टेंडर : 09
- फोम टेंडर : 05
- मल्टी पर्पज : 01
- मिनी हाई प्रेशर : 06
- बाइक बैकपैक यूनिट : 07
- वाटर कैनर : 02
इन सबमें सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि डोईवाला फायर स्टेशन में आज भी फायर टेंडर नहीं है। वहां केवल एक वाटर मिस्ट और एक मल्टी-फंकशनल इक्विप्मेंट के सहारे पूरा क्षेत्र चल रहा है, और आज श्री गुरु राम राय स्कूल में लगी आग की घटना उसी क्षेत्र में घटी। स्कूल में लगी आग को लेकर डोइवाला एफएसओ देवेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि आग बढ़ने से पहले ही काबू पा लिया गया। यदि आग काबू से बाहर होती तो बैकअप के रूप स्टेशन व्यवस्था रखता है।
इस सब के बाद यह तो साफ है कि यह बैकअप या तो जॉलीग्रांट से लिया जाता है, या फिर ऋषिकेश और देहरादून स्टेशनों के भरोसे पर रहता है।
त्योहारों का मौसम, खतरा और बढ़ा
दीपावली करीब है। बाजारों में तारों, झालरों और पटाखों की तैयारियाँ तेज़ हैं। ऐसे में शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाएँ बढ़ने की संभावना और ज़्यादा है। हालांकि फायर ब्रिगेड अधिकारियों का कहना है कि त्योहारों के दौरान विशेष सतर्कता बरती जा रही है। लेकिन सवाल वही है कि क्या स्कूलों में फायर सेफ्टी ड्रिल समय पर हो रही हैं? क्या फायर एक्सटिंग्विशर वाकई काम कर रहे हैं? या फिर क्या इमरजेंसी गेट खुले रहते हैं?
स्कूल प्रबंधन और प्रशासन दोनों जिम्मेदार
हर बार की तरह इस बार भी जांच के आदेश दे दिए गए हैं, लेकिन जिम्मेदारी तय नहीं होती। एनएसयूआई के वरिष्ठ छात्र नेता विनीत प्रसाद बंटू का कहना है कि छात्र हमारे देश का भविष्य है। ऐसी घटनाएं हमारे भविष्य के लिए खतरा हैं, स्कूलों में फायर सेफ्टी महज़ दिखावे की चीज़ बन गई है। बच्चों की सुरक्षा तब तक अधूरी है, जब तक सिस्टम में जवाबदेही तय नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों को गंभरता से लेते हुए कड़े कदम उठाने चाहिए। अगर रवैया गैरजिम्मेदाराना रहा तो छात्र संगठन आंदोलन को मजबूर होगा।
CBSE आग जैसे मामलों पर गंभीर
सीबीएसई आग जैसे मामलों पर गंभीर
स्कूलों में आग लगने की बढ़ती घटनाओं को लेकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सभी स्कूलों को सुरक्षा मानकों की सख्ती से पालना करने के निर्देश दिए हैं। सीबीएसई दिशा-निर्देश (2022) के अनुसार, भवन निर्माण, विद्युत फिटिंग और फायर सेफ्टी उपकरणों का वार्षिक ऑडिट अनिवार्य रूप से कराया जाना चाहिए।
“स्कूल प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि फायर अलार्म, आपात निकास और फायर एक्सटिंग्विशर हमेशा क्रियाशील स्थिति में रहें, क्योंकि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। बोर्ड की ओर से स्कूलों को रिमाइंडर जारी किया जाएगा कि सभी संस्थान अपने परिसर में फायर सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखें। किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर बोर्ड नियमों के पालन में कोई रियायत नहीं देगा।”
— सुनिता कश्यप, असिस्टेंट सेक्रेटरी, सीबीएसई देहरादून रीजन
अब वक्त ‘समीक्षा बैठक’ नहीं, ‘सुधार’ का है
भानियावाला से लेकर इंदिरा नगर तक, आग की लपटें सिर्फ दीवारें ही नहीं जला रहीं, बल्कि हमारे भरोसे को भी राख कर रही हैं। स्कूलों में सुरक्षा के नाम पर औपचारिकता खत्म करनी होगी, क्योंकि हर घटना के बाद “सौभाग्य से कोई हताहत नहीं” कहते-कहते, कहीं वो ‘सौभाग्य किसी दिन’ खत्म न हो जाए।
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