उत्तराखंड में बच्चों के लिए कफ सिरप पर सख्त नियंत्रण, सरकार ने दिए निर्देश
Dehradun, 06 October: त्योहारों के मौसम में जहां आम जनजीवन तेज़ी से रफ्तार पकड़ रहा है, वहीं उत्तराखंड सरकार ने बच्चों की सेहत को लेकर बड़ा और एहतियाती कदम उठाया है। कफ सिरप के अंधाधुंध उपयोग और वितरण पर अब पूरे प्रदेश में सख्त नियंत्रण लागू किया गया है। सरकार ने यह निर्णय तब लिया है जब केंद्र सरकार ने दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कफ सिरप के प्रयोग से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य आशंकाओं को लेकर 3 अक्टूबर को एक विशेष एडवाइजरी जारी की थी।
दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं
स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन डॉ. आर. राजेश कुमार ने सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्साधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस एडवाइजरी का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी स्तर पर बच्चों की दवा से जुड़ी लापरवाही या जोखिम न हो।
लापरवाही से हो सकते हैं गंभीर दुष्परिणाम
डॉ. कुमार ने चेतावनी दी कि बच्चों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अंधाधुंध दवा का प्रयोग गंभीर दुष्परिणाम पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में बच्चों की खांसी और जुकाम स्वतः ठीक हो जाती है, इसलिए चिकित्सकों को अनावश्यक रूप से दवाओं का प्रयोग करने से बचना चाहिए।
कफ सिरप के नमूनों की होगी जांच
औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी जिलों में कफ सिरप के नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला जांच कराई जाए। जांच में दोषपूर्ण या हानिकारक पाए जाने वाले सिरपों को तुरंत बाजार से हटाने के आदेश दिए गए हैं।
केवल GMP-अनुरूप दवाओं की ही होगी खरीद
सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं कि वे केवल Good Manufacturing Practices (GMP) के अनुरूप निर्मित दवाओं की ही खरीद और वितरण करें।
विभाग की जनता से अपील
जनता से अपील करते हुए डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि माता-पिता बच्चों को कोई भी दवा देने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रतिबंधित या अधोमानक दवाओं की बिक्री व उपयोग पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का स्पष्ट संदेश
राज्य सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्वास्थ्य के साथ किसी भी स्तर पर खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी दवाओं के उपयोग पर अब सख्त निगरानी और कार्रवाई दोनों एक साथ लागू की जाएंगी।
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